लोधी राजपूत जनकल्याण समिति ने अमर शहीद वीरांगना महारानी अवंती बाई लोधी का 168 वां बलिदान दिवस मनाया

फरीदाबाद, 20 मार्च। लोधी राजपूत जनकल्याण समिति (रजि) फरीदाबाद द्वारा अमर शहीद वीरांगना महारानी अवंतीबाई लोधी चौक एनआईटी फरीदाबाद में शहीद वीरांगना महारानी अवंतीबाई लोधी जी का 168वां बलिदान दिवस समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मास्टर उदयचंद शास्त्री ने की। मुख्य अतिथि भाजपा ओबीसी मोर्चा मोर्चा के जिलाध्यक्ष एवं नवनिर्वाचित पार्षद भगवान सिंह, पूर्व विधायक नगेन्द्र भड़ाना, सचिन तंवर, श्रीमती मनीषा चौधरी, स्वामी वीरभद्र, सुमित रावत, नन्दकिशोर लोधी, लाखनसिंह लोधी, रूपसिंह लोधी, धर्मपाल सिंह लोधी, अर्जुन सिंह लोधी, अजबसिंह लोधी, उदयचन्द द्वारा दीप प्रज्ज्वलित किया गया। सभी उपस्थित अतिथियों ने पुष्प अर्पित कर नमन् किया।

अमर शहीद वीरांगना महारानी अवंतीबाई लोधी के 168 वां बलिदान दिवस समारोह में चित्र के समक्ष पुष्प अर्पित करते मुख्य अतिथि नवनिर्वाचित पार्षद भगवान सिंह साथ है समिति संस्थापक महासचिव लाखनसिंह लोधी व अन्य।

इस अवसर पर समिति संस्थापक/महासचिव लाखनसिंह लोधी ने अवंतीबाई लोधी की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अमर शहीद वीरांगना महारानी अवंतीबाई लोधी का जन्म 16 अगस्त 1831 को मध्यप्रदेश के जबलपुर के पास मनकेड़ी के जमींदार राव जुझार सिंह लोधी परिवार में हुआ था, बचपन से ही शस्त्रों से लगाव था। इनका विवाह रामगढ़ के युवराज विक्रमादित्य के साथ हुआ जिनकी दो संतानें अमान सिंह और शेरसिंह थे। 1857 स्वतंत्रता संग्राम की पहली नायिका जिन्होंने अंग्रेजों से लोहा लिया, एफआरआर रैडमैन द्वारा 1912 में सम्पादित मण्डला गजेटियर में इनकी वीरता की गौरवगाथा अंकित है। 15 जनवरी 1858 के युद्ध में रानी के पलटवार से कैप्टन वाडिंग्टन तो अपनी जान बचाकर भाग गया परन्तु वाडिंग्टन का बेटा रोमियो नामक बालक मैदान में रह गया जिसे सहृदयता रानी ने अंग्रेजी कैम्प में अपने सैनिकों से भिजवा दिया, वाडिंग्टन ने प्रभावित होकर रानी को पत्र लिखा कि आप बगावत छोड़ दें तो सरकार की ओर से आपका राज्य सुरक्षित रहेगा। रानी के मना करने पर वाडिंग्टन ने हमले किये जिस कारण रानी के कुशल नेतृत्व में कई युद्ध हुए, पुन:वाडिंग्टन ने 20 मार्च 1858 को लैफ्टिनेंट वार्टन एवं लैफ्टिनेंट कॉकवर्न और रीवा नरेश के साथ मिलकर हमला किया दोनों ओर से भयंकर युद्ध हुआ अंग्रेजी सेना काफी बड़ी होने के कारण। रानी ने घायल होने पर चारों ओर से घिरा देख स्वयं की कटार आत्मबलिदान कर देश पर शहीद हो गई। ऐसी वीरांगना की गाथा पाठ्यक्रम में शामिल करनी चाहिए। जिससे युवा पीढ़ी को पता चले कि आजादी कैसे मिली।

इस अवसर पर जागेश्वर राजपूत, प्रेमसिंह लोधी, राजेश कुमार वर्मा, सुधीर कुमार लोधी, महावीर सिंह लोधी, मुकेश राजपूत, शीशपाल शास्त्री, प्रकाश चन्द, राकेश राजपूत, कंचन सिंह लोधी, जय सिंह, पवन राजपूत, ओमप्रकाश लोधी, नरेश कुमार लोधी, श्रीमती ज्योति, हरीश पाहवा, विनोद जादौन, मंजेश, हीरा लाल, रामगोपाल, रमेश कुमार, गौरव, इन्दर कुमार लोधी, आनंद लोधी आदि उपस्थित रहे।

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