विशाल बाग ने अपनी रचनाएं तुमने जबसे अपनी पलकों पर रखा, कालिख को सब काजल-काजल कहते हैं…आदि पेश कर श्रोताओं की जमकर तालियां बटोंरी

– बुक्स एंड बीयोंड द्वारा साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन

– लेखक विशाल बाग ने पहली किताब वीराने तक जाना है..की रचनाएं कीं सांझा

फरीदाबाद, 30 अप्रैल : बुक्स एंड बियोंड द्वारा साहित्यक शाम का आयोजन किया गया जिसमें लेखक विशाल बाग ने अपनी पहली किताब वीराने तक जाना है.. की रचनाएं श्रोताओं से सांझा की। कार्यक्रम का आयोजन ग्रेटर फरीदाबाद स्थित मनस्कृति स्कूल में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बुक्स एंड बियोंड की अध्यक्ष श्वेता अग्रवाल ने की जबकि विशेष रूप से मनस्कृति स्कूल की प्रिंसीपल ज्योति भल्ला सहित अनेक गणमान्यजन मौजूद रहे।

इस मौके पर विशाल बाग ने अपने जीवन के बारे में कई संस्मरण श्रोताओं से सांझा किया और इंजीनियर से लेखक बनने की यात्रा बताई। उन्होंने बताया कि वीराने तक जाना है, उनकी पहली किताब है। कश्मीर में जन्मे विशाल पेशे से इंजीनियर हैं और परिवार के साथ पुणे में रहते हैं तथा वहीं एक आईटी कंपनी में काम करते हैं। उन्हें कश्मीरी, हिंदी, उर्दू, पंजाबी, मराठी और गुजराती आदि भाषाओं की अच्छी जानकारी है।

विशाल बाग ने अपनी रचनाएं तुमने जबसे अपनी पलकों पर रखा, कालिख को सब काजल-काजल कहते हैं, लफज देकर खय़ाल को हमने, शक्ल, बेशक्ल की बिगाड़ी है..आदि पेश कर श्रोताओं की जमकर तालियां बटोंरी। लेखिका जयश्री सेठी ने विशाल बाग़ से उनके जीवन और लेखन से जुड़े सवाल-जबाब किए। इस मौके पर श्वेता अग्रवाल व ज्योति भल्ला ने विशाल बाग का स्वागत करते हुए उनका आभार व्यक्त किया।

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