आखिरकार लंबे चले सियासी उठापटक के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दिया अपना इस्तीफा

मध्यप्रदेश। मध्यप्रदेश में आखिरकार लंबे चले सियासी उठापटक के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपना इस्तीफा राज्यपाल लालजी टंडन को सौंप दिया है। राज्यपाल को सौंपे अपने इस्तीफे में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने लिए कि उन्होंने अपने चालीस वर्ष के सार्वजनिक जीवन में हमेशा से शुचिता की राजनीति की है और प्रजातांत्रिक मूल्यों को सदैव तरजीह दी है। मध्य प्रदेश में पिछले 2 हफ्ते में जो कुछ भी हुआ वह प्रजातांत्रिक मूल्यों के अवमूल्यन का एक नया अध्याय है।

इससे पहले मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मुख्यमंत्री निवास पर प्रेस कॉफेंस में भाजपा पर बड़ा हमला बोला। मुख्यमंत्री निवास पर विधायक दल की बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करने हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ अपनी सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए भावुक नजर आए, उन्होंने कहा कि मेरा क्या कसूर था। मुख्यमंत्री ने फ्लोर टेस्ट में न जाने का फैसले करते हुए इस्तीफा देने का एलान करते हुए कहा कि कि मुझे भाजपा के प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है मुझे प्रदेश की जनता का प्रमाण पत्र चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा पहले दिन से ही सरकार गिराने का षडय़ंत्र रच रही थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कुछ मूल्यों का पालन किया है और उसको आगे भी करेंगे। उन्होंने कहा कि मेरे पास पद हो या नहीं हो लेकिन हम प्रदेश के कामों के हित में लगे रहेंगे। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपनी प्रेस कॉफेंस में कहा सबको याद रखना होगा कि आज के बाद कल आता है और कल के बाद परसों आता है और यहां भी परसों आएगा।

बतौर मुख्यमंत्री अपनी आखिरी प्रेस कॉफेंस में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कि सिंधिया का नाम लिए बिना कहा कि एक तथाकथित जनता द्धारा नकारे गए महत्वाकांक्षी, सत्तालोलुप महाराज और उनके द्धारा प्रोत्साहित 22 लोभियों के साथ मिलकर भाजपा ने खेल रच लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या की जिसकी सच्चाई थोड़े ही समय में सभी के सामने आगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता के साथ धोखा करने वाले इन लोभियों एंव बागियों को जनता कभी माफ नहीं करेगी।

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