बाहर के खाने के कारण आंतों में इन्फेक्शन की वजह से भी हो जाती है इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज : डॉ. बीर सिंह सहरावत

फरीदाबाद : प्रोग्राम क्लिनिकल डायरेक्टर एवं एचओडी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स फरीदाबाद ने बताया कि इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज आंतों की बीमारी है। इसके अंदर दो बीमारियां आती हैं-अल्सरेटिव कोलाइटिस और क्रॉन्स डिजीज। अल्सरेटिव कोलाइटिस में बड़ी आंत के छाले हो जाते हैं जिससे मरीजों को बार बार शौच आना, मल के साथ खून आना, पेट में दर्द होना, वजन कम होना, कमजोरी आना आदि समस्याएं होती हैं। क्रॉन्स डिजीज में छोटी और बड़ी दोनों आंत प्रभावित होती हैं। इस बीमारी में मरीज को बार-बार पेट में दर्द होना, मल के साथ खून आना, उल्टी होना, वजन कम होना, कमजोरी आना आदि समस्याएं होती हैं। इस बीमारी के रोजाना ओपीडी में 2-3 मरीज आते हैं।

इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज उन लोगों में होती है जिनके शरीर में इस बीमारी को बढ़ाने वाले जीन्स पाए जाते हैं। बाहर के खाने के कारण आंतों में इन्फेक्शन की वजह से भी हो जाती है। अधिक मिर्च मसाले और तले भुने खाद्य पदार्थों के सेवन से भी इंफ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज के लक्षण बढ़ सकते हैं। इसलिए घर में बने संतुलित आहार लेने की सलाह दी जाती है। बाहर के खाने, अधिक मिर्च मसाले और तले भुने खाद्य पदार्थों के सेवन से परहेज करें। दूषित पानी और फूड से परहेज करें क्योंकि इनका सेवन इस बीमारी को बढ़ा सकता है। अधिक मानसिक तनाव लेने से बचें। ज्यादा लूज मोशन होने पर दूध का सेवन से बचें। आप दही या छाछ ले सकते हैं।

बीमारी का पता करने के लिए ब्लड टेस्ट, पेट का अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एंडोस्कोपी या कोलोनोस्कोपी जांच की जाती हैं।

जांच के बाद गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट द्वारा दवाएं शुरू की जाती हैं जिससे मरीज ठीक हो जाता है। अक्सर मरीज में खून की कमी देखने को मिलती है जो धीरे धीरे दवाओं से ठीक हो जाती है।

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