आर्कबिशप मिटी हाई स्कूल कैलिफोर्निया के छात्रों का भारत भ्रमण – “द राइजिंग तमसो मा ज्योतिर्गमय” के बच्चों के साथ साझा किए बहुमूल्य क्षण

फरीदाबाद (मनीष शर्मा) : कैलिफोर्निया के प्रसिद्ध आर्कबिशप मिटी हाई स्कूल के छात्र एक बार फिर प्यार और भाईचारे का संदेश लेकर भारत पहुंचे। लगातार तीसरी बार वे फरीदाबाद स्थित गैर सरकारी संगठन एनजीओ “द राइजिंग तमसो मा ज्योतिर्गमय” के बच्चों से मिलने आए और उनके साथ एक न भूलने वाला दिन बिताया। द राइजिंग तमसो मा ज्योतिर्गमय के फाउंडर सदस्य रविन्द्र कुमार मनचंदा ने बताया कि इस विशेष यात्रा में आर्कबिशप मिटी हाई स्कूल के 12वीं कक्षा के 25 छात्रों ने अपने शिक्षकों श्रीजॉन, जैनी, एबी, मिका और परविज के साथ राइजिंग एनजीओ के वंचित स्लम वर्ग के बच्चों को इंडियन रेल म्यूज़ियम की विजिट करवाई।

इस पूरे कार्यक्रम का कुशल समन्वय सेंट.जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल, फरीदाबाद की 8वीं कक्षा की छात्रा राहदिखा शर्मा ने किया, जो पिछले आठ वर्षों से इस एनजीओ से जुड़ी हुई हैं। इस आयोजन में उनकी सहपाठी शानवी, परीशा और सानवी ने भी सक्रिय योगदान दिया। नेशनल रेल म्यूज़ियम पहुंचने पर आर्कबिशप मिटी हाई स्कूल के छात्रों ने एनजीओ के बच्चों का बेहद गर्मजोशी से स्वागत किया। राहदिखा शर्मा ने दोनों स्कूलों के बच्चों का एक दूसरे से परिचय कराया जिसके बाद एनजीओ के बच्चों ने अपने हाथों से बनाए हुए ग्रीटिंग कार्ड्स आर्कबिशप मिटी हाई स्कूल के छात्रों और शिक्षकों को भेंट किए। लगभग तीन घंटे तक आर्कबिशप मिटी हाई स्कूल के बच्चों ने एनजीओ के छोटे छोटे बच्चों का हाथ थामकर पूरा म्यूज़ियम घुमाया, झूले खिलाए, टॉय ट्रेन राइड कराई और सबने एक साथ बैठकर लंच किया।
कार्यक्रम के अंत में एनजीओ के संस्थापक अध्यक्ष तरुण शर्मा और रविन्द्र कुमार मनचंदा ने आर्कबिशप मिटी हाई स्कूल के सभी छात्रों और शिक्षकों का भारत आने के लिए हृदय से धन्यवाद किया तथा एनजीओ की ओर से उन्हें अप्रिसिएशन सर्टिफिकेट प्रदान किए। तरुण शर्मा ने टैक हाउस से सुमित फिलिप्स, राम और सुरेश का भी विशेष धन्यवाद किया जिन्होंने इस विजिट को सफल बनाने में अपना सहयोग दिया। उन्होंने कहा, “हमारे बच्चों के लिए यह एक बेहद यादगार पल है और वे पूरे वर्ष इस दिन का इंतजार करते हैं। अंत में, आर्कबिशप मिटी हाई स्कूल की तरफ से श्री जॉन तथा राइजिंग एनजीओ की तरफ से राहदिखा शर्मा ने वोट ऑफ थैंक्स धन्यवाद ज्ञापन दिया और शीघ्र ही फिर से भारत आने का निमंत्रण दिया। यह आयोजन इस बात का जीवंत उदाहरण रहा कि स्कूल ही वह स्थान है जहाँ मानवता की सच्ची सीख मिलती है।



