कानूनी पेंच फंसा ईको ग्रीन के एग्रीमेंट में

गुरुग्राम (मदन लाहौरिया) 1 जनवरी। नववर्ष की शुभ वेला में ईको ग्रीन कंपनी के द्वारा एग्रीमेंट की शर्तों का उलंघन किये जाने का खुलासा किया जा रहा है! आप सभी पाठकों को नववर्ष की शुभकामनायें! आइये! जरा अब ईको ग्रीन के द्वारा एग्रीमेंट की शर्तों का उलंघन किये जाने का ब्यौरा देखें तो पता लगता है कि ईको ग्रीन के द्वारा कूड़े ढोने वाली गाडिय़ों में जीपीएस का सिस्टम नहीं लगाया व कितनी गाडिय़ां कूड़े को उठाने में लगी हुई हैं इस का ब्यौरा नहीं दिया गया! एग्रीमेंट के मुताबिक हर गाड़ी में जीपीएस सिस्टम लगाना जरूरी है ताकि सभी आरडब्लूए के लोगों को पता रहे कि कूड़ा उठाने वाली गाड़ी किस लोकेशन पर है या नहीं है और कितनी गाडिय़ां कूड़ा उठा रही हैं इस बात का पता जीपीएस सिस्टम गाडिय़ों में लगाने से मालूम हो जाता है! दूसरी शर्त यह भी है कि कूड़ा उठाने वाली गाड़ी रोजाना डोर टू डोर कूड़ा उठाने के लिए आने से पहले आरडब्लूए को सूचित करेगी! यह नहीं किया जा रहा! एग्रीमेंट के अनुसार 400 कूड़ा संग्रहण केंद्र बनाये जाने थे व हर कूड़ा केंद्र पर कूड़ा डालने के बड़े कंटेनर रखे जाने थे, कूड़ा संग्रहण केंद्र 400 नहीं बनाये गए व कूड़े के बड़े कंटेनर भी सभी कूड़ा केंद्रों पर नहीं रखे गए! एमएसडब्लू यानि म्यूनिसपल सॉलिड वेस्ट सभी आरडब्लूए के इलाकों से ईको ग्रीन के वाहनों के द्वारा उठाया जाना था जो कि नहीं उठाया गया!

जून 2017 में हुए एग्रीमेंट के एक साल के भीतर गुरुग्राम का पूरा कूड़ा 100 प्रतिशत उठाये जाने की शर्त थी व एग्रीमेंट की तारीख से 6 महीने के भीतर बंधवाड़ी में अलग अलग किया जाना था ये दोनों ही शर्तें पूरी नहीं हुई! कूड़े के वजन की रिपोर्ट की मॉनिटरिंग का स्टेटस क्या है? इस की रिपोर्ट नहीं है! हर महीने की वर्क स्टेटस रिपोर्ट नहीं दी गई! सरकार के शहरी स्थानीय विभाग के द्वारा दिए जाने वाले कूड़े को उठाने व बंधवाड़ी तक ले जाने के एवज में 1000 रूपये प्रति टन की रकम की हर महीने की स्टेटस रिपोर्ट नहीं है! बंधवाड़ी पर कूड़ा निस्तारण का प्लांट एग्रीमेंट की शर्तों के अनुसार समय पर नहीं लगाया गया व वहां पर पर्यावरण कानून के अनुसार प्रदूषण को कम करने के लिए ग्रीन बैल्ट व पार्कों का निर्माण व हरा भरा करने का काम नहीं किया गया! ईको ग्रीन कंपनी के द्वारा एग्रीमेंट की इन सारी शर्तों का खुलेआम उलंघन किया जब की सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत 75 करोड़ रूपये की धनराशि ग्रांट के रूप में दी! गुरुग्राम के सरकारी अधिकारीयों के द्वारा भी कुछ क़ानूनी रूप से गलतियां की गई हैं जैसे कि ईको ग्रीन के साथ आयोजित की गई बैठक की मिनट्स रिपोर्ट बैठक के कई दिनों बाद लिखा जाना भी सरकारी अरों की निष्ठा व ईमानदारी पर सवालिया निशान लगाता है!

ईको ग्रीन के द्वारा एग्रीमेंट की शर्तों का उलंघन किये जाने के बारे व सरकारी अफसरों के द्वारा भी की गई गलतियों के बारे में जब जनवादी सफाई कर्मचारी कल्याण संघ के सलाहकार राजेंद्र सरोहा से बात की गई तो उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया करते हुए कहा कि जब ईको ग्रीन कंपनी एग्रीमेंट की शुरुआत से ही शर्तों का उलंघन करती आ रही थी तो गुरुग्राम नगर निगम के अफसरों ने ईको ग्रीन के खिलाफ कार्यवाही क्यों नहीं की? नगर निगम के अफसरों की इस लापरवाही का भुगतान आज तक गुरुग्राम की जनता को सडक़ों पर लगे हुए कूड़े के ढेरों के रूप में करना पड़ रहा है! उन्होंने कहा कि ईको ग्रीन कंपनी ने एग्रीमेंट की शर्तों का पूर्णतया उलंघन करते हुए बंधवाड़ी में 35 लाख टन कूड़े का पहाड़ खड़ा कर दिया जिस वजह से वहां के आस पास के सैंकड़ों लोगों को कैंसर व अन्य कई गंभीर रोग हो चुके हैं!एग्रीमेंट की शर्तों के अनुसार ईको ग्रीन को एग्रीमेंट के 6 महीने के भीतर कूड़े को अलग अलग कर के कूड़े से बिजली बनाने का काम शुरू करना था जो आज तक नहीं हो पाया! ईको ग्रीन की इस लापरवाही की वजह से ही गुरुग्राम की सडक़ों व हर गली कूचों में कूड़े कर्कट के ढेर लगते चले गये! राजेंद्र सरोहा ने आगे बताया कि ईको ग्रीन कंपनी के साथ एग्रीमेंट के समय हरियाणा सरकार के जिन अफसरों ने बैठकें की उन बैठकों की मिन्ट्स रिपोर्ट भी कई कई दिन बाद लिखी गई जो कि सरकारी अफसरों की ईमानदारी पर शक का दायरा खड़ा करती है! इन सभी कारणों से ईको ग्रीन कंपनी के एग्रीमेंट की शर्तों की गहराई से जांच करते हुए ईको ग्रीन कंपनी के खिलाफ व दोषी पाये जाने वाले सरकारी अफसरों के खिलाफ अपराधिक मामले दर्ज किये जायें ताकि गुरुग्राम की जनता को जो कूड़े कर्कट व गंदगी की वजह से घोर तकलीफ सहनी पड़ रही है उस में जनता को न्याय मिल सके!

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