किसान विरोधी काले कानूनों से सबसे ज़्यादा मध्यम वर्ग होगा प्रभावित : वेदप्रकाश यादव

फरीदाबाद ! वरिष्ठ कांग्रेसी नेता वेदप्रकाश यादव ने किसान आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए कहा कि उनकी पार्टी और वो किसानों की मांग से पूरी तरह से सहमत है। उनकी मांग जायज है। इस लिए केंद्र सरकार को हठ धर्मिता छोड़नी चाहिए और किसानों की मांग को तुरंत मान लेना चाहिए।

श्री यादव ने कहा कि मोदी सरकार का ये काला कानून देश के किसानों को भूमिहीन बनाने की साजिश तो है ही इसके साथ ही किसानों को उद्योगपतियों का बंधुआ मज़दूर बनाने जैसा है। उन्होंने कहा कि बेशक इस काले कानून की आहट सबसे पहले किसान ने सुनी है। लेकिन सबसे ज्यादा प्रभावित मज़दूर और मिडिल क्लास होने वाला है। जब बड़ी-बड़ी कम्पनियां अनाज, फल और सब्जी स्टोर कर लेंगी तो डिमांड और सप्लाई पूरी तरह से उनके हाथ में होगी। जैसे आज प्याज जैसी मामूली सब्जी गरीब की पहुंच से बाहर हो चुकी है। उसी तरह अनाज, फल और सब्जी के लिए मिडिल क्लास को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

हम सभी ने देखा है कि भाजपा सरकार में इस बार आलू के रेट ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और सीज़न में भी ये अपने पहले वाले रेट पर नहीं आ पाया है। यदि यह काला कानून वापस नहीं लिया गया तो आने वाले समय में स्थिति और भी भयानक हो सकती है। इसलिए देश के लोग इसे केवल किसानों का आंदोलन न समझे बल्कि मोदी सरकार का ये कानून हम सभी पर किसी वज्रपात से कम नहीं होगा। सब्जी और फल की आज की अपेक्षा में पांच से सात गुना ज्यादा कीमत हमें चुकानी पड़ सकती है। कॉरपोरेट हाउस के पहले शिकार किसान जरूर हैं लेकिन असली निशाना तो मिडिल क्लास ही है। इसलिए जो लोग आज इसे केवल किसानों का आंदोलन समझ कर अपने घर में चुप-चाप बैठे हैं। उन्हें भी इस मुद्दे पर अपने सांसद और विधायक से सवाल पूछते हुए किसानों के पक्ष में दबाव बनाना चाहिए। क्योंकि ये मुद्दा केवल किसानों के हित को प्रभावित करने वाला नहीं बल्कि इस काले कानून से पूरा देश के लोग प्रभावित होने वाले हैं।

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