जेएनयू विश्वविद्यालय रिसर्च का एक अनूठा संगम

गुरुग्राम (मदन लाहौरिया) 30 दिसंबर। जिस जेएनयू विश्वविद्यालय को सरकार के द्वारा राष्ट्रद्रोही माना जाता है वही जेएनयू देश का रिसर्च के क्षेत्र में एक अनूठा संगम है! जेएनयू में देश के कोने कोने से आ कर छात्र छात्रायें अलग अलग विषयों पर रिसर्च वर्क करते हुए पढ़ाई करते हैं! जेएनयू पूरे देश भर में रिसर्च के क्षेत्र में अपनी अलग ही पहचान रखता है! जेएनयू से देश के महान शोधकर्ता पढ़ कर आज देश का नाम रोशन कर रहे हैं! देश के महान शोधकर्ताओं को शिक्षित करने वाला जेएनयू कभी भी राष्ट्रद्रोही मार्ग पर नहीं चल सकता! जेएनयू की छवि खराब करने के लिए समय समय पर साजिश रचते हुए प्रयास किये जाते हैं परंतु यहां के शोधकर्ताओं की टीम व छात्रों के संघर्ष से आज भी जेएनयू देश में रिसर्च के क्षेत्र में अपना एक अलग ही स्थान रखता है!
पिछले महीने जेएनयू में छात्रों का आंदोलन चल रहा था उसी वक्त जेएनयू में एक तीन दिवसीय सस्टेनेबल अर्बन वॉटर मैनेजमैंट सिस्टम पर सेमिनार का आयोजन प्रोफेसर दिनेश अबरोल के नेतृत्व में हुआ! इस सेमिनार में हरियाणा के गुरुग्राम के जीएमडीए के अधिकारी व गुडग़ावं जल मंच के सदस्य भी शामिल हुए! इस दौरान जेएनयू का माहौल बहुत ही बढिय़ा देखने को मिला! अभी हाल ही में जेएनयू में एक दो दिवसीय राष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन का आयोजन जेएनयू के संस्कृत विभाग के मुखिया प्रोफेसर रामनाथ झा के नेतृत्व में हुआ! इस सम्मेलन में पूरे देश से संस्कृत के विद्वान व प्रोफेसर तथा शोधकर्ता शामिल हुए व उन्होंने अपने अपने संस्कृत में शोधपत्र प्रस्तुत किये! इन दोनों सम्मेलनों ने साबित कर दिया कि देश की जनता के सामने जेएनयू की छवि जो खराब रूप में पेश की गई है वह एक बहुत बड़ी साजिश के तहत की गई है! पूरे देश की जनता को आज भी जेएनयू की रिसर्च पर गर्व है!



