अखिल भारतीय ट्रेड यूनियनों के आव्हान पर कर्मचारियों ने जेल भरो आंदोलन के तहत प्रदर्शन किया

फरीदाबाद ! केन्द्र सरकार व प्रदेश सरकार की मजदूर एवं कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ अखिल भारतीय फेडरेशन व संयुक्त ट्रेड यूनियनों के आव्हान पर प्रस्तावित कार्यक्रम में हरियाणा प्रदेश के समस्त जिलों में जारी जिला सचिवालयों पर सत्याग्रह आंदोलन की 78 वीं वर्षगांठ पर जेल भरो आन्दोलन में भिन्न-भिन्न विभागों के हजारों मजदूर एवं कर्मचारियों ने जिला लघु सचिवालय सेक्टर-12 फरीदाबाद पहुँचकर भाग लिया । प्रशासन की ओर से भारी पुलिस बल पहले से तैनात किया हुआ था । सरकार की श्रम कानूनों में बदलाव व कर्मचारी विरोधी नीतियों व निजीकरण के खिलाफ केंद्र व राज्य सरकार जो कि कर्मचारियों का शोषण व पूंजीपतियों के हाथ मजबूत करने का जो काम यह सरकार आयेदिन कर रही है । उसके खिलाफ समस्त हरियाणा प्रदेश में सरकारी महकमों के निजीकरण करने को लेकर और सार्वजनिक क्षेत्रों के उपकरणों को बेचना, रेलवे विभाग का फ्रेंचाइजी करना, बैंकों को अन्य निजी बैंकों के साथ समायोजित करने, नगर निगम का पूर्णतः निजीकरण करना, मिड डे मिल कर्मी, आशा वर्कर, आंगनवाड़ी वर्कर, रोडवेज परिवहन विभाग, बिजली निगम, एलआईसी, पब्लिक हेल्थ, जन स्वास्थ्य विभाग आदि ऐसे अनेकों विभाग इस भाजपा सरकार ने निजी हाथों में देने की जो कवायद तेज की है । उसके खिलाफ देश का तमाम मजदूर व कर्मचारी एकजुटता के साथ लामबन्द होकर आज खिलाफत में सड़कों पर आमादा है ।

कोरोना काल के ऐसे आपातकाल के समय मे जब देश को मजदूर और कर्मचारियों की जरूरत थी । तब स्वेच्छा से इन्ही ने कर्मियों ने सरकार के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर पूरा साथ शिद्दत से दिया । सत्याग्रह के इस आन्दोलन में हरियाणा कर्मचारी महासंघ के बैनरतले व संयुक्त ट्रेड कर्मचारी संघ व सर्व कर्मचारी संघ आदि श्रमिक संगठनों से जुड़े अनेकों विभागों के हजारों कर्मचारियों ने बढ़ चढ़ कर जेल भरो आंदोलन में भाग लिया । हरियाणा स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड वर्कर्स यूनियन संबंधित हरियाणा कर्मचारी महासंघ के प्रदेश महासचिव सुनील खटाना ने कर्मचारियों को संबंधित करते हुए बताया कि आज सभी कर्मचारी व श्रमिक अपने को जेल में जाने को तैयार होकर आये हैं । जिन्हें गिरफ्तार किया जाए । जिसके बाद तहसीदार ने पुलिस बल की मौजूदगी में पहुँचकर सभी की आंदोलकारियों की गिरफ्तारी की व कुछ देर बाद रिहा भी कर दिया । महासचिव सुनील खटाना ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान आई भयंकर आपदा को केंद्र व प्रदेश सरकार ने अवसर के रूप में लिया है । पूरे देश की जनता जहाँ भयंकर भुखमरी, बेतहाशा महँगाई और बढती बेरोजगारी से जूझ रही है । वहीं केन्द्र व प्रदेश की गठबन्धन सरकारी ने इसकी आड़ में सरकारी उपक्रमों को अपने चहेते पूंजीपतियों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के औने पौने दामों पर बेच रही है । आर्थिक रूप से समृद्ध सभी सार्वजनिक क्षेत्रों के बड़े उपक्रमों को विनिवेश के नाम पर पर बड़े पूंजीपतियों के हवाले किया जाना निश्चित रूप से कर्मचारियों के साथ साथ आम जनता के लिये चिन्ता का सबब बन गया है ।

कर्मचारी नेताओं ने कहा कि श्रम कानूनों में पूंजीपतियों के पक्ष में बदलाव किए जा रहे हैं । काम के घंटे बढ़ाने से निश्चित रूप से बेरोजगारी बढ़ेगी, कोरोना काल मे लगभग 12 करोड़ लोग पूरे देश मे बेरोजगार हो चुके हैं । केन्द्र सरकार से कदमताल करते हुए प्रदेश सरकार भी पीछे नही है । आयेदिन बड़े बड़े दावों के बावजूद कर्मचारियों को नौकरी से हटाया जा रहा है । कच्चे कर्मचारियों की बात तो दूर कोर्ट का हवाला देते हुए 10 वर्षों से प्रदेश में कार्य कर रहे 1983 पीटीआई अध्यापकों को नौकरी से हटा दिया गया । अगर सरकार आज के इस कार्यक्रम के बाद भी कर्मचारियों की माँगों को पूरा नही करती तो आने वाले समय मे एक बड़े आन्दोलन की घोषणा की जायेगी । जॉकी जिम्मेदारी पूर्ण रूप से प्रदेश सरकार की होगी । सत्यग्रह के इस जेल भरो आंदोलन में लगभग 43 विभागों ने हिस्सा लिया । जिसमे मुख्यरूप से बिजली विभाग से सर्कल सचिव सन्तराम लाम्बा, हरियाणा कर्मचारी महासंघ से लेखराज चौधरी व कर्मवीर यादव, रोडवेज परिवहन विभाग से रविन्द्र नागर, पब्लिल हेल्थ से योगेश शर्मा, जयभगवान, मनोज सोलंकी, मदनगोपाल, सोनू, बिसन देव, मुकेश, चतर सिंह, सियाराम, हरिशंकर, सुधीर, ठाकुर दास, बलजीत, चरण सिंह आदि सैंकड़ों कर्मचारी नेता ने इस जेल भरो आंदोलन में हजारों कर्मचारियों के साथ भाग लिया ।  

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!