लोधी राजपूत जन कल्याण समिति फरीदाबाद के फेसबुक पर अनिल मलिक ने बच्चों की परवरिश के तौर-तरीकों पर चर्चा की

फरीदाबाद। हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद कि राज्य स्तरीय महत्वाकांक्षी परियोजना बाल सलाह, परामर्श एवं कल्याण केंद्रों के अंतर्गत सोशल डिस्टेंसिंग की अनुपालन करते हुए निरंतर राज्य भर के बच्चों उनके शिक्षकों व अभिभावकों के साथ-साथ आम जनमानस को मनोवैज्ञानिक प्रोत्साहन, प्रेरणा व परामर्श सेवाओं का लाभ प्रदान किया जा रहा है। इसी कड़ी में लोधी राजपूत जन कल्याण समिति, फरीदाबाद के फेसबुक पर मंडलीय बाल कल्याण अधिकारी रोहतक एवं राज्य नोडल अधिकारी अनिल मलिक ने अच्छी परवरिश के तौर-तरीकों पर चर्चा करते हुए बताया कि एक ऐसा मधुर रिश्ता मजबूत गठबंधन कि लोग आप पर रश्क करने लगे और आप बस मुस्कुराते रहें, खुशी महसूस करते रहे, एक दूसरे को आलिंगन बंद करते रहें, सहारा दे ,हाथों में हाथ डालकर जीवन पथ पर आगे बढ़ते रहें। रिश्तो के बंधन में कभी कमजोर मत पड़ जाना, लापरवाही नहीं बस भरोसा और विश्वास बढ़ाना है।

अभिभावकों को समय रहते ही बेहतर परवरिश के तरीके अपनाने होंगे और उसकी शुरुआत शैशव काल से ही अपनी वृद्धावस्था की तैयारी शुरू करते हुए करनी होगी। बच्चों में संस्कारों का निर्माण हमेशा से ही घर के बड़े बुजुर्गों, माता-पिता द्वारा ही किया जाता है। शिक्षा- दीक्षा के साथ व्यवहारिक आचरण से हम नैतिक मूल्यों का निर्माण कर सकते हैं इसलिए जितना जरूरी हो बच्चों को सीख प्रदान करें उतना ही महत्वपूर्ण खुद के आचरण, व्यवहार, शब्द भाव शैली पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। बाल्यावस्था से ही बच्चों में आत्मविश्वास को विकसित करने पर ध्यान दीजिए। समय-शिक्षा-पैसा जीवन में जरूरी है, लेकिन इन्हें कमाया जाता है, कीमत समझाएं अर्जित करें, सदुपयोग करें, तत्पश्चात आवश्यकता से अधिक जितना है उसे बांट दें।

आशा, उम्मीद, हौसला कभी कम ना होने पाए। मनुष्य का नजरिया, लक्ष्य, सहयोग भाव विकसित करना होता है अहमियत समझाएं, वास्तविकता के करीब रहे। किशोरों की परवरिश के दौरान माता-पिता हमेशा बच्चों के जीवन में शामिल रहे उनकी जरूरतें ,रुचियां और व्यवहार को नजदीक से समझें। दोस्तों की जानकारी जरूर रखें, परिवार, व्यवहार, उनकी दैहिक भाषा को समझना जरूरी है। किशोरों की मनोवैज्ञानिक जरूरतों को आवश्यकता से समझें सुरक्षा की भावना, उदासीनता, अकेलापन, निराशा, अवसाद कभी ना बढऩे दें। माता पिता परवरिश के नियमों की समझ रखते हुए इस बात को समझें कि किशोर-युवा और बुजुर्गों के आपसी भावनात्मक रिश्ते हमेशा ही लाभप्रद रहे हैं इसलिए तीनों पीढिय़ों को नए कौशल सीखने का अवसर प्रदान करना चाहिए। बुजुर्गों की आशंकाओं, बच्चों और युवाओं में बेहतर समझ विकसित करने, बुजुर्गों को बढ़ती हुई उम्र को सकारात्मकता देने और परिस्थिति को स्वीकार करना सिखाए। परिवर्तन प्रकृति का नियम है इसलिए अपनी उम्र विशेष पर फोकस ना करते हुए समय विशेष पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। कार्यक्रम के सफल आयोजन में लाखन सिंह लोधी, रूप सिंह लोधी, अनार सिंह लोधी, धर्मपाल लोधी इत्यादि इत्यादि की विशेष भूमिका रही।

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