श्री धार्मिक लीला कमेटी में कुम्भकरण का वध हुआ
कुम्भकरण के किरदार में गुलशन नागपाल ने अपने 30 वर्षों अनुभव की कला दर्शकों को दिखाई

फरीदाबाद : श्री धार्मिक लीला कमेटी के निर्देशक हरीश चन्द्र आज़ाद ने बताया कि रात मंच पर कुम्भकरण का वध हुआ। प्रथम दृश्य में रावण कुम्भकरण को युद्व में भेजने के लिये उनके द्वार आता है लेकिन कुम्भकरण गहरी निंद्रा में होते हैं तब रावण मंत्रियों से कहते हैं कि कुम्भकरण को जगाने का प्रबंध किया जाये। मंत्रीगण ढोल, ताशे, नगाड़ों के साथ कुम्भकरण को जगाते हैं जिस तरह से मंत्री और राक्षस कुम्भकरण को जगाते हैं दर्शक बहुत आन्नद लेते हैं। उसके बाद कुम्भकरण निंद्रा से जागते हैं और रावण कुम्भकरण को बताता है कि अयोध्या के दो राजकुमारों ने लंका पर आक्रमण कर दिया है और सारा वितरांत उन्हें बताते हैं तो कूम्भकरण रावण को सचेत करता है कि यह दोनों राजकुमार साधारण मनुष्य नहीं हैं बल्कि विषणु का अवतार है श्रीराम, जिसे सुनकर रावण और गुस्से में आ जाता है और स्वंम युद्व में जाने की कहता है तब कुम्भकरण युद्व में जाने को मानता है और रावण को विश्वास दिलाता है कि यदि वह दोनों राजकुमार विषणु का अवतार भी हुए तो भी ऐसा भंयंकर युद्व होगा जिसे देवता सदियों तक याद रखेगें।

अगले दृश्य में राम और कुम्भकरण का भयंकर युद्व होता है कुम्भकरण का यह संवाद आज रणचंडी भयंकर रूप धर कर आयेगी, मैं चलूंगा जिस तरफ जय साथ होता जायेगी दर्शकों को तालियाँ बजाने पर मजबूर कर देता है तो वहीं राम का संवाद कर्म जब अच्छे नहीं तो जीत फिर होगी कहाँ, देख कड़वे नीम में लगती हैं कहाँ नारगींयाँ दर्शकों को आन्नदित करता है। कुम्भकरण के किरदार में गुलशन नागपाल ने अपने 30 वर्षों अनुभव की कला दर्शकों को दिखाई। राम के किरदार में जितेश गेरा, लक्ष्मन के रोल में राजू खरबंदा व रावण के अभिनय में तेजिन्द्र खरबंदा ने बेहतरीन अभिनय किया।



