ना खाओ! ना पीओ! करो पेटबंदी !

गुरुग्राम (मदन लाहौरिया) 30 मार्च। इस वक्त देश में चारों ओर कोरोना वायरस से ज्यादा लोगों को भूखा मारने का वायरस ज्यादा फैला हुआ है! माना कि पूरे विश्व में कोरोना वायरस की चपेट में हजारों लोग आयें हैं परंतु भारत की केंद्रीय सरकार बिलकुल ही गलत दिशा में चल पड़ी जिस वजह से आज जो लाखों मजदूरों का एक राज्य से दूसरे राज्य में पलायन हो रहा है वो केंद्रीय सरकार के द्वारा की गई लॉक डाउन की गलत नीतियों के कारण हो रहा है!
12 फरवरी को देश के एक विपक्षी नेता ने जब यह गंभीर संकेत दे दिया था कि भारत में भी कोरोना का असर हो सकता है तब भी केंद्रीय सरकार नहीं जागी! मार्च के महीने में हमारे प्रधानमंत्री ने कुछ नौसिखिये वैज्ञानिकों की राय से कोरोना वायरस पर दवाईयों व खान पान के सिस्टम को बदलकर नियंत्रण करने की योजना के बजाय पूरे देश को लॉक डाउन कर दिया!
हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले पांच वर्षों से ही भारत की जनता की पीठ पर पीछे से अचानक ही ऐसा प्रहार करते हैं कि जनता त्राहिमाम! त्राहिमाम! कर उठती है! उदाहरण के तौर पर नरेंद्र मोदी ने पहले अचानक ही नोटबंदी की, जीएसटी के रूप में फिर टैक्सबंदी की, फिर हिंदू मुस्लिम की भाईचारा बंदी, फिर राजनैतिक शत्रुबंदी, फिर विपक्षबंदी, फिर एनआरसी व सीएए के जरिये नागरिकबंदी और फिर अब कोरोना वायरस का भूत दिखा कर सडकबंदी, तालाबंदी व पेटबंदी कर दी!
बड़ी हैरानी की बात है कि नरेंद्र मोदी ने अब तक जितनी भी बंदियां की हैं उनका अब तक देश में कोई भी सकारात्मक परिणाम नहीं निकला उलटे हर बंदी के बाद भारत की आर्थिक स्थिति दिन प्रतिदिन खराब होती चली गई और प्रधानमंत्री मोदी अपने मातहत सभी मंत्रियों व सांसदों को कठपुतली की तरह नचाते हुए अपने गलत फैसले लागू करवाते रहे और बाद में नौटंकी करते हुए मन की बात में हर बार देश की जनता से माफी मांग लेते हैं जैसा कि इस लॉक डाउन के गलत फैसले के बाद मोदी ने कल मन की बात में जनता से माफी मांगने का नाटक किया! इसके बाद पूरे देश के उन के चमचे कड़छे उनकी वाह वाही करने लगते हैं व फिर एक नई राजनैतिक जंग लडऩे व जीतने के लिए साम दाम दंड भेद सहित तैयारी कर लेते हैं! यह है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूरा दार्शनिक दर्शन व उनके गलत फैसलों से भारत की जनता के द्वारा लगातार आर्थिक तंगहाली के बढ़ते आत्महत्याओं की ओर जाने का दर्शन!
अब हम यदि बात करें कोरोना वायरस के प्रभाव की तो हमारे देश में पहले चिकनगुनिया भी हुआ है व लाखों लोग हर साल हमारे देश में भिन्न भिन्न बीमारियों से मरते हैं! लाखों की संख्या में बीमारियों से हर साल मरने वाले उन लोगों की पहले तो मोदी सरकार ने कभी इस प्रकार मार्केटिंग व ब्रांडिंग नहीं की! फिर इस बार यह जरूरत क्यों पड़ी?
अभी तक पूरे देश के भिन्न भिन्न इलाकों से जो खबरें छन छन कर आ रही हैं उन के मुताबिक कोरोना वायरस का इलाज तो हर भारतीय डॉक्टर के पास है जो कि बुखार, खांसी व जुकाम की साधारण दवाईयों से ही ठीक किया जा सकता है परंतु मोदी सरकार के दबाव के चलते इस वक्त इस देश का हर डॉक्टर घबराया हुआ है और डॉक्टरों को यहां तक चिंता सता रही है कि यदि उन्होंने निजी तौर पर कोरोना वायरस के मरीजों को ठीक करना शुरू कर दिया तो मोदी सरकार उन डॉक्टरों को या तो कोरोना संक्रमित घोषित कर देगी या उन को जिंदगी से ही हाथ धोना पड़ेगा!
अब आईये! बात करते हैं अब भारतीय गरीबों, मजदूरों व किसानों की तो इस देश की माटी पुकार पुकार कर कह रही है कि लॉक डाउन को तुरंत प्रभाव से खोला जाये ताकि इस देश की माटी के लाल भूखे प्यासे ना मर सके! हकीकत में हमारी भारत भूमि का ठोस आधार ही गरीब व मजदूर वर्ग तथा किसान वर्ग है और इस वक्त मोदी सरकार के गलत फैसलों की वजह से गरीब वर्ग व मजदूर वर्ग के लिए ऐसे हालात पैदा कर दिये गये हैं कि यह कहावत उस गरीब वर्ग की दयनीय हालात पर सटीक बैठ रही है कि ना खाओ! ना पीओ! करो पेट बंदी!



