जे.सी. बोस विश्वविद्यालय ने डिजिटल मूल्यांकन से एक माह के भीतर घोषित किए मई-2026 परीक्षा परिणाम
हरियाणा का पहला सरकारी विश्वविद्यालय, जिसने उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन की शुरुआत की

फरीदाबाद, 4 अगस्त : जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद ने उन्नत डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के सफल क्रियान्वयन के बाद विश्वविद्यालय परिसर तथा संबद्ध महाविद्यालयों के मई-2026 परीक्षाओं के परिणाम एक माह के भीतर घोषित कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
विश्वविद्यालय इस डिजिटल पहल को शुरू करने वाला हरियाणा का पहला सरकारी विश्वविद्यालय बन गया है। यह परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ एवं आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रणाली से मूल्यांकन प्रक्रिया के प्रत्येक स्तर पर सही, सुरक्षित, पारदर्शी एवं जवाबदेही व्यवस्था सुनिश्चित होने के साथ-साथ मूल्यांकन की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है।
विश्वविद्यालय द्वारा मई-2026 की परीक्षाओं से डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली लागू की गई है। इस प्रणाली में उच्च गति से उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग, सुरक्षित ऑन-स्क्रीन डिजिटल मूल्यांकन, अंकों एवं ग्रेड की स्वचालित प्रोसेसिंग तथा प्रॉक्टर्ड ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाता है। इसके माध्यम से शिक्षक ऑनलाइन माध्यम से अधिक लचीलेपन और सटीकता के साथ उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कर सकते हैं।
इस प्रणाली की एक प्रमुख विशेषता यह है कि विद्यार्थी अपने ईआरपी लॉगिन के माध्यम से ऑनलाइन अपनी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाएं देख सकते हैं तथा अनुत्तरित प्रश्नों, अंकों के योग में त्रुटि अथवा कम अंक दिए जाने संबंधी आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। इन आपत्तियों पर विश्वविद्यालय द्वारा विचार किया जाता है और आवश्यकता होने पर आवश्यक सुधार किए जाते हैं। इससे परीक्षा संबंधी शिकायतों और उत्तर पुस्तिकाएं प्राप्त करने के लिए आवेदनों में भी उल्लेखनीय कमी आई है। साथ ही, हर बार उत्तर पुस्तिकाओं को ढूंढने में लगने वाले समय की समस्या भी समाप्त हुई है। खास बात यह है कि मई-2026 की परीक्षा के दौरान किसी भी उत्तर-पुस्तिका के गुम होने या बदले जाने को लेकर कोई शिकायत नहीं मिली।
परीक्षा नियंत्रक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने कहा कि एक माह के भीतर परीक्षा परिणाम घोषित करना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और यह डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की प्रभावशीलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस पहल से संपूर्ण मूल्यांकन प्रक्रिया में दक्षता एवं जवाबदेही बढ़ी है तथा परिणाम तैयार करने में लगने वाले समय में भी उल्लेखनीय कमी आई है। विश्वविद्यालय ने डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली लागू करने से पहले शिक्षक के लिए उत्तर पुस्तिकाओं के ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन संबंधी प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए थे।
कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने कहा कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को अपनाना परीक्षा व्यवस्था में एक प्रगतिशील कदम है, जिससे पारदर्शिता, शुद्धता, दक्षता एवं विश्वसनीयता में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली विश्वविद्यालय को न्यूनतम संभव समय में परीक्षा परिणाम घोषित करने तथा विद्यार्थियों की शिकायतों का अधिक प्रभावी ढंग से समाधान करने में सहायता करेगी।
विश्वविद्यालय अब परीक्षा प्रक्रिया में और अधिक तकनीक आधारित सुधार लागू करने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसके तहत न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप के साथ प्रश्नपत्र तैयार करने एवं प्रोसेसिंग के लिए डिजिटल समाधान विकसित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं, साथ ही प्रश्नपत्रों की गोपनीयता एवं सुरक्षा के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित किया जाएगा।



