मोदीनगर अग्निकांड : शवों को देख महिला और पुरुष की पहचान कर पाना भी मुश्किल !

मोदीनगर ! गाजियाबाद जिले के मोदीनगर में हुआ हादसा इतना खौफनाक था कि किसी के भी रोंगटे खड़े जो जाएं। मोमबत्ती बनाने की अवैध फैक्टरी में आग लगने से कई लोग जिंदा जल गए। मंजर ऐसा था कि परिजन बेबस आंखों से अपनों को आग की लपटों के बीच छटपटाते हुए देखते रहे, लेकिन फैक्टरी में मौजूद लोग जिंदा ही जल गए। हादसा इतना भीषण था कि जान गंवाने वाले आठ लोगों का शरीर 100 प्रतिशत तक जल गया था। एसडीएम खालिद अंजुम का कहना है कि हमारे लिए शवों में यह अंतर कर पाना भी मुश्किल हो रहा है कि कौन महिला और कौन पुरुष हैं। शव बुरी तरह से जले हुए थे, जिसकी वजह से उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा है। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर शवों की शिनाख्त करने की कोशिश की जा रही है। अगर जरूरत पड़ी तो डीएनए टेस्ट भी कराया जा सकता है।
प्रशासन की तरफ से जानकारी दी गई कि सुभारती अस्पताल मेरठ में भर्ती तीन लोगों की हालत नाजुक बनी हुई है। बताया जा रहा है कि उनका शरीर 60 से 80 प्रतिशत तक जला हुआ है। इनमें से भी दो लोगों के चेहरे व शरीर के अन्य हिस्से इतने ज्यादा जले हुए हैं कि पहचान कर पाना मुश्किल है। एसडीएम का कहना है कि गंभीर हालत में भर्ती तीन लोगों की स्थिति नाजुक बनी हुई है। आवश्यकता पड़ी तो उन्हें हायर सेंटर में भी इलाज की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। एनसीआर क्षेत्र में किसी भी तरह के पटाखे व ज्वलनशील उत्पाद बनाने पर पूरी तरह से रोक है, लेकिन उसके बाद भी पुलिस की सरपरस्ती में आरोपी नितिन कुमार पटाखे बनाने का काम करता रहा। नियम के तहत एनसीआर में सिर्फ ग्रीन पटाखे बनाए जा सकते हैं। उसके लिए भी संबंधित सेक्टर मजिस्ट्रेट से अनुमति लेनी होती है। पटाखे बनाने का काम आबादी क्षेत्र में किसी भी सूरत में नहीं किया जा सकता है।
घटना के बाद डीएम अजय शंकर पांडेय ने एसडीएम खालिद अंजुम को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। सूत्रों का कहना है कि मजिस्ट्रेट की तरफ से रविवार रात को ही स्थानीय लोगों के बयान दर्ज कराने शुरू कर दिए हैं। कुछ लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। बाकी कुछ लोगों से आज बयान लिए जाने हैं, जिसके बाद शाम तक जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी जाएगी। सूत्रों का कहना है कि अभी तक की जांच में सामने आया है कि पुलिस की सरपरस्ती में बीते एक वर्ष से अवैध फैक्टरी धड़ल्ले से चल रही थी। कुछ दिन पहले ही पुलिस ने उसका माल उठाया था। उसके बाद एक-दो दिन तक काम बंद रहा, लेकिन जैसे ही पुलिस के पास किस्त पहुंची तो जब्त किया गया सामान लौटा दिया गया। इसके बाद फिर से फैक्टरी के अंदर काम शुरू हो गया।



