कम उम्र में हो रहे हदयघात के कारण व बचाव पर कार्यशाला आयोजित

फरीदाबाद, 25 मई। नगर निगम फरीदाबाद के कान्फ्रेन्स हाॅल में एसएसबी हार्ट हाॅस्पिटल की तरफ से कम उम्र में हो रहे हदयघात के कारण व बचाव पर कार्यशाला हुई। उक्त कार्यशाला में नगर निगम के आयुक्त यशपाल यादव, अतिरिक्त आयुक्त अभिषेक मीना, स्वास्थ्य अधिकारी नितिश परवाल एसएसबी हार्ट हास्पिटल के एम0डी0 डा0 एस0एस0 बंसल तथा अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया। उक्त कार्यशाला में डा0 एस0एस0 बंसल ने वहां उपस्थित जनों को हृदयाघात को आकस्मिक मृत्यु का प्रमुख कारण बताया तथा बचाव के बारे में जानकारी दी।
डा0 एस0एस0 बंसल ने कहा कि हृदयाघात किसी भी उम्र में हो सकता है, हृदयाघात के लिए मरीज को पहले से ब्लड प्रेशर या शुगर की बीमारी हो यह जरूरी नहीं है। कम उम्र में हृदयाघात ज्यादा खतरनाक होते हैं और ऐसा होने पर मरीज को बचाया जाना कठिन होता है। मरीज की आयु 40 वर्ष से कम होने पर हृदयाघात के कारण आनुवंशिक, मोटापा, खानपान में लापरवाही, अनियमित दिनचर्या व भावनात्मक रूप से ज्यादा संवेदनशीलता होती है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवा मोबाइल का उपयोग गेम खेलने में ज्यादा कर रहे हैं। इससे हृदय में भावनात्मक स्ट्रेस बढ़ने से गंभीर बीमारी बढ़ने की संभावना रहती है। असमय घबराहट होना व पसीने का आना, नियमित काम करने में कमजोरी का अनुभव होना, गंभीर हृदयाघात के आरंभिक लक्षण हो सकते हैं। हृदयाघात के लिए छाती में दर्द होना जरूरी नहीं है। पेट में, तालू में व कंधे में होने वाला दर्द भी कई बार हृदयाघात के लक्षण हो सकते है।
डा0 एस0एस0 बंसल ने बताया कि ई0सी0जी0 द्वारा हृदयाघात को आरंभिक समय में पहचाना जा सकता है। ई0सी0जी0 हृदय की सामान्य जांच होती है जिसमें हृदयाघात होने पर ईलेक्ट्रो फिजियोलॉजी में परिवर्तन को चिकित्सक द्वारा समझा जाता है।
डा0 बंसल ने बताया कि हृदय को स्वस्थ रखने के लिए नियमित दिनचर्या, कार्बाेहाईड्रेट खाद्य पदार्थों का कम उपयोग व सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की कसरत अर्थात् 30 मिनट प्रतिदिन व सप्ताह में 5 दिन कसरत करने की आदत डालनी चाहिए।



