कोरोना : सूत ना पूनी जुलाहे लठ्ठम लठ्ठा !

गुरुग्राम (मदन लाहौरिया) 24 अप्रैल। इस वक्त पूरे विश्व में कोरोना वायरस के नाम पर एक जबरदस्त जंग छिड़ी हुई है! यह जंग कोरोना वायरस की उत्पति के कई कारणों को ले कर मची हुई है! बड़े बड़े महारथी देश कोरोना वायरस को फैलाने के लिए एक दूसरे पर आरोप लगाते हुए थकते नजर नहीं आ रहे! कोरोना वायरस की इस जंग में बीमारी के वैज्ञानिक कारण खोजने के प्रयास कम नजर आ रहे हैं और बीमारी फैलाने या फैलने के कारणों पर एक महा राजनीति करने के प्रयास ज्यादा नजर आ रहे हैं! दिसंबर 2019 में सब से पहले कोरोना वायरस चीन की सी फूड मार्किट में फैला तो सभी जगह खबर फैली कि यह वायरस खतरनाक जानवरों का मांस खाने की वजह से फैला है! फिर बात आई कि चमगादड़ों से पेंगोलिन नाम के जानवर में हुआ और पेंगोलिन से चीन के नागरिकों में आया!
जब कोरोना वायरस धीरे धीरे दूसरे देशों में पहुंचने लगा तो चीन पर आरोप लगाये जाने लगे कि चीन ने यह जैविक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया है! जब कोरोना वायरस यूरोपियन देशों अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, इटली, फ्रांस व स्पेन में बड़ी तेजी से प्रवेश कर गया तो इन देशों के द्वारा खुलेआम आरोप चीन पर लगाये जाने लगे परंतु इन देशों में से किसी भी देश ने इस कोरोना वायरस की उत्पति के कारणों की गहराई में जाने का प्रयास ही नहीं किया!
वल्र्ड हैल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्लूएचओ ) जैसी विश्व स्तरीय संस्था ने भी कोरोना वायरस पर बड़ी खतरनाक ढंग से राजनीति करते हुए कोरोना वायरस के अजीबोगरीब आंकड़े व उपाय के तरीके भिन्न भिन्न देशों को बताने शुरू कर दिये! इन देशों में से किसी भी देश ने यह नहीं सोचा कि कोरोना वायरस के प्रकोप से बचाने के लिए नागरिकों के इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए हर्बल एवं आयुर्वेद जैसी महान उपचार पद्वति अपनाई जाये व खान पान के सिस्टम को बदल कर शाकाहार व फल…फ्रूट…हरी सब्जियों व प्रोटीन युक्त दालों का भोजन में इस्तेमाल करवा के इस वायरस से बचाव का रास्ता भी नहीं बताया गया!
चीन सहित सभी यूरोपियन देशों में कोरोना वायरस से पीडि़त लोगों की ज्यादा संख्या में मौत होने का सब से बड़ा जो कारण रहा है वो है उन देशों के नागरिकों के शरीर का इम्यून सिस्टम का काफी कमजोर होना! इन सभी देशों में कोरोना से मरने वाले लोगों में सभी उन्हीं देशों के रहने वाले लोग हैं! 53 देशों की जो रिपोर्ट है उस के मुताबिक इन 53 देशों में भारतीय लोगों की केवल मात्र 40 या 50 की संख्या में कोरोना से मौत हुई है व कोरोना संक्रमित भारतीय इन 53 देशों में मात्र 3 हजार के लगभग है! जब कि विश्व के इन सभी देशों में कोरोना से मरने वाले लोगों की संख्या आज तक लगभग 1 लाख 80 हजार है और संक्रमित लोगों की संख्या 26 लाख के लगभग है!
कोरोना वायरस के इस भयंकर प्रकोप का प्रभाव विश्व के भिन्न भिन्न देशों में रहने वाले लाखों की संख्या में भारतीयों पर क्यों नहीं हुआ? यह एक बहुत बड़ी रिसर्च का विषय है! इस विषय पर गहरा शोध कर के हम ने पाया कि लाखों की संख्या में हमारे भारतीय विश्व के जिन जिन देशों में रहते हैं वहां पर हमारे सभी भारतीयों का खान पान बहुत ही शुद्ध व शाकाहारी है! इस कारण विदेशों के भारी जलवायु व मौसम परिवर्तन के बावजूद भी हमारे भारतीयों के शरीर का इम्यून सिस्टम बाहर विदेशों में रहते हुए भी ठीक है! यही एक मात्र सब से बड़ा कारण है कि बाहर विदेशों में हमारे भारतीयों की कोरोना से होने वाली मृत्यु दर जीरो के बराबर है!
कोरोना वायरस ने सब से ज्यादा तबाही अमेरिका में ही मचाई है! एक रिसर्च के अनुसार न्यूयार्क में वेंटिलेटर पर रखे जा रहे 10 में से 9 मरीज अपनी जान गंवा रहे हैं! न्यूयार्क के बारे में यह बात भी सामने आई है कि जिन लोगों को कोरोना के तहत भर्ती किया गया उनमें से 94 प्रतिशत लोग पहले से ही किसी न किसी अन्य बीमारियों से पीडि़त थे! नेशनल हैल्थ सर्विस (एनएचएस) इंग्लैंड के आंकड़ों के अनुसार देशभर के अस्पतालों में 17 अप्रैल तक जिन 13 हजार 918 पीडि़तों की मौत हुई थी उन में तीन फीसदी यानि करीब 420 भारतीय मूल भारतवंशी थे! भारतवंशी भारतीय मूल के जो भी लोग थे वे बहुत पुराने समय पहले ही भारत छोड़ कर ब्रिटेन चले गये! इसलिए विदेशों में रह रहे बहुत पुराने भारतवंशियों व इस वक्त पिछले 15 से 20 वर्ष पहले विदेशों में जा कर बसने वाले भारतीयों के शरीर के इम्यून सिस्टम में काफी अंतर है और इन्हीं कारणों से विदेशों में रह रहे भारतीयों की मृत्यु दर ना के बराबर है!
अब हम बात करते हैं पहले विश्व के उन सभी देशों की जहां पर कोरोना से जबरदस्त मौतें हुई हैं! इन देशों में वहां के नागरिकों का जबरदस्त मांसाहारी होना ही इस कोरोना वायरस से होने वाली जबरदस्त मौतों का मुख्य कारण है! इन देशों में काफी वर्षों से अपने आप को हैल्थ केयर देश घोषित कर के हैल्थ के प्रति सारा साल भारत से कहीं बहुत ज्यादा ख्याल रखने की योजनायें लागू रहती हैं! परंतु दूसरा पहलू यदि इन देशों का देखा जाये तो इन के नागरिकों के द्वारा वहां के फ्रीजर में रखा हुआ कई कई दिन का पुराना व बासी मीट मांस खाया जाता है व साथ में ही बहुत खतरनाक जानवरों का मांस भी सेवन किया जाता है! जिस वजह से खतरनाक बैक्टीरिया,वायरस व विषाणु के रोग लगते हैं! इस मांसाहार के प्रति इन सभी देशों में कभी प्रतिबंध नहीं लगाया गया! यही मुख्य कारण है कि वहां के लोगों का इम्यून सिस्टम इतना ज्यादा कमजोर हो गया है कि कोरोना वायरस के संक्रमण को बर्दाश्त नहीं कर पाये!
बड़ी हैरानी की बात है कि अपने गलत खान पान के दोष को ना देख कर इन सभी देशों के राजनेता एक दूसरे देश पर कोरोना वायरस के संक्रमण फैलाने का आरोप लगा रहे हैं! ये सभी देश आर्थिक व विकास के स्तर पर विश्व में अपना परचम तो लहराते हैं परंतु अपने नागरिकों के खानपान पर नियंत्रण ना रख पाने की वजह से कोरोना वायरस से मुकाबला करने की कोई भी दवाई इजाद नहीं कर पाये यानि जो हमारे देश में कहावत है कि सूत ना पूनी जुलाहे लठ्ठम लठ्ठा वो इन देशों पर पूर्णतया उतरती है क्यों कि सूत रूपी इन देशों के नागरिकों का खानपान कतई ठीक नहीं है तो पूनी रूपी इम्यून सिस्टम ठीक कैसे होगा और जब खानपान रूपी सूत व इम्यून रूपी पूनी ही इन देशों के पास नहीं है तो फिर इन सभी देशों के राजनेता जुलाहे की तरह आपस में एक दूसरे पर आरोप लगाते हुए लठ्ठम लठ्ठा क्यों हो रहे हैं? यह एक बेहद गंभीर विषय है! इसलिए कोरोना वायरस के मामले में विश्व के इन सभी देशों पर सूत ना पूनी जुलाहे लठ्ठम लठ्ठा वाली कहावत पूर्णतया उतरती है!



