मध्यम वर्ग पर टूटा मुसीबतों का पहाड़ !

गुरुग्राम (मदन लाहौरिया) 16 अप्रैल। कोरोना वायरस के चलते लंबे समय के लिए किये गये लॉक डाउन की वजह से देश प्रदेश का मध्यम वर्ग इस वक्त जबरदस्त बदहाली की स्थिति में है! मध्यम वर्ग को इस वक्त यह चिंता सता रही है कि वें जायें तो जायें कहां? देश में मध्यम वर्ग का हिस्सा पचास फीसदी से ऊपर है! इस समय मध्यम वर्ग के लोगों में चिंता व तनाव की स्थिति से बड़ी भारी घबराहट बढ़ती जा रही है और उनमें विचार पनपने लगे हैं कि उनका क्या कसूर है?
इस देश में जब जब भी कोई संकट आया या सरकारों ने कोई भी अहम् फैसले जनता पर लादे तो हमेशा मध्यम वर्ग ही ज्यादा प्रभावित हुआ! चाहे वो नोटबंदी का समय हो या जीएसटी का फरमान हो या हिंदू मुस्लिम दंगे फ़साद हों या कोई भी अन्य आंदोलन हों हमेशा इन सभी मामलों में मध्यम वर्ग को ही सब से पहले शिकार बनाया जाता है! इस वक्त देश में मध्यम वर्ग को खत्म करने की जबरदस्त साजिश चल रही है! यदि मध्यम वर्ग ना हो तो देश के अमीर वर्ग की भी गाड़ी नहीं चल सकती और गरीब वर्ग का भी भरण पोषण मध्यम वर्ग के बगैर नहीं हो सकता! मध्यम वर्ग ही एक ऐसा वर्ग है जो अमीर वर्ग को भी काम कर के धन कमा के देता है व गरीब वर्ग की मदद कर के भी उस का सहारा बनता है!
नोटबंदी के समय की तरह ही इस वक्त देश पर अचानक लॉक डाउन थोपा गया जिस वजह से देश का मध्यम वर्ग जबरदस्त संकट में है! लॉक डाउन का समय बढऩे की वजह से मध्यम वर्ग के सामने भोजन का संकट पैदा हो गया है! माना कि कोरोना वायरस जैसी गंभीर बीमारी ने भारत को भी अपनी चपेट में ले लिया है परंतु भारतीय सरकार की अदूरदर्शिता के चलते देश में भारी भूखमरी फैलने जैसा महारोग उभर आया है!
देश का मध्यम वर्ग 15 से 25 हजार रूपये मासिक वेतन तक की नौकरियां वाला बहुत बड़ी संख्या में है व इसी प्रकार मध्यम वर्ग के लोग छोटे छोटे काम धंधों की दुकानदारी में करोड़ों की संख्या में हैं! इन छोटे छोटे दुकानदारों की दुकानें बंद हैं जिस कारण ये मध्यम स्तर के दुकानदार अब भयंकर भूखमरी के कगार पर आ खड़े हुए हैं! मध्यम वर्ग के वेतन भोगी लोगों को भी अब नौकरी जाने का पूरा पूरा खतरा पैदा हो गया है व उन का वेतन भी संकट में है!
लॉक डाउन की मार मध्यम वर्ग के बुजुर्गों पर भी भारी पड़ी है! जो बुजुर्ग अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रसित हैं वे अस्पताल व क्लिनिक बंद होने की वजह से अपना इलाज नहीं करवा पा रहे और इन गंभीर बीमारियों से ग्रसित इन बुजुर्ग मरीजों की हालात भी काफी खराब हैं! मध्यम वर्ग के परिवारों के पढऩे वाले बच्चों का भविष्य भी अंधकार में डूबता जा रहा है! कोरोना वायरस का जो जबरदस्त डर व भय का माहौल बना दिया गया है उस की वजह से मध्यम वर्ग के लोग अपने स्वास्थ्य की समस्याओं से संबंधित भी बात करने से बड़ा भारी घबरा रहे हैं! पुलिस प्रशासन का इतना ज्यादा डर व भय बिठा दिया गया है कि मध्यम वर्ग के परिवारों के बुजुर्ग व बच्चे तो मानसिक तनाव में घिर कर जबरदस्त बीमारियों के शिकार हो जायेंगे! इस वक्त भारत में कोरोना वायरस की बीमारी का जोर..जुल्म व डंडे की तान पर ठीक करने का प्रयास किया जा रहा है! जो कि जनहित व देशहित में बिलकुल नहीं है! कोई भी बीमारी कभी भी जबरदस्ती डंडे की तान पर ठीक नहीं की जा सकती! अब हम इस खबर में कोरोना वायरस व लॉक डाउन की असली स्थिति के बारे में चर्चा कर लेते हैं!
भारत में कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए जो कहा जा रहा है कि लॉक डाउन ही एक अकेला उपाय है वह बिलकुल उचित नहीं है! यह बात तो तब कही जा सकती थी कि जब कोरोना वायरस फैलने से रोकने वाले देश में और उपाय ना होते तो यह बात मानी जा सकती थी कि लॉक डाउन ही एक मात्र उपाय है! पूरे देश को एकदम बगैर किसी तैयारी के लॉक डाउन कर देना भारत के मध्यम वर्ग को पूर्णतया खत्म करने की एक बहुत बड़ी साजिश हो सकती है!
जनवरी के आखिर में भारत में पहला कोरोना वायरस का पॉजिटिव केस सामने आ जाने के बावजूद शुरुआत के दौर में हमारी सरकार ने अनेक गलत कदम उठाये! मार्च के महीने तक हवाई अड्डों पर जांच की रस्म अदायगी भर के लाखों लोगों को जिन में भारतीय नागरिक भी शामिल थे, दूसरे देशों से भारत में आने दिया! अमेरिका, यूरोप व मध्य पूर्व के देशों से हजारों लोग भारत आये अनेकों कोरोना संक्रमित भारतीय तथा विदेशी नागरिकों को देश भर में बगैर किसी रोक टोक के घूमने दिया गया! जिस कारण इन कोरोना संक्रमित विदेशों से आये लोगों से भारत में कोरोना फैलता रहा और भारतीय सरकार पूर्णतया लापरवाही बरतते हुए गहरी नींद में सोई रही! भारत सरकार ने अपनी इस जबरदस्त लापरवाही को छिपाते हुए भारत में कोरोना वायरस फैलाने का इल्जाम कभी तो चीन पर या कभी मुस्लिम जमातियों पर लगाना शुरू कर दिया और एक गहरी साजिश के तहत भारत के लोगों के दिलों में कोरोना फैलाने के लिए एक विशेष धर्म के लोगों पर इल्जाम लगाते हुए नफऱत का जहर फैलाना शुरू कर दिया!
भारत सरकार ने कोरोना वायरस से मुकाबला करने की तैयारियां करने में काफी देरी की व भारत सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित एक बहुत बड़ी गलती की कि पूरे देश के अस्पतालों में सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं तक को निलंबित कर दिया! इस बड़ी गलती के कारण देश के अन्य भिन्न भिन्न गंभीर बीमारियों से पीडि़त मरीजों को उनकी गंभीर बीमारियों के लिए इलाज नहीं मिल सका और वे भय तथा डर के कारण कोरोना वायरस के तहत मरने लगे!
यही सब से बड़ा कारण है कि देश में अब तक जितनी मौतें कोरोना वायरस के तहत दिखाई जा रही हैं उन में से 86 फीसदी मरने वाले ऐसे लोग हैं जो पहले से ही किडनी,दिल,लिवर, ब्लड प्रेशर या फेफड़ों की बीमारी से ग्रसित थे! ऐसे मरीजों को लॉक डाउन के तहत इन संबंधित बीमारियों का इलाज मिल नहीं सका और इन को घरों से उठा कर कोरोना पॉजिटिव केस जांच में दिखा कर एक भय व भारी डर के वातावरण में डाल कर मौत के द्वार पर पहुंचा दिया गया!
सरकारी अस्पतालों की दुर्दशा के बारे में तो हमारा देश हमेशा से महान रहा है! भारतीय सरकार के वर्तमान प्रधानमंत्री के लाखों उन अंधभक्तों को अच्छी तरह से पता है कि पूरे देश के सरकारी अस्पतालों की बहुत ही खराब हालात है! ऐसे में मध्यम वर्ग का व्यक्ति वर्तमान की इस भारतीय सरकार व प्रधानमंत्री पर कैसे विश्वास करे? इस वक्त देश का मध्यम वर्ग इस जबरदस्ती ढंग से किये गये लॉक डाउन की वजह से बहुत ज्यादा आर्थिक बदहाली की तरफ बड़ी तेजी से बढ़ता जा रहा है!



