राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह : धैर्य से यातायात के नियमों का पालन करें

फरीदाबाद : राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एन आई टी तीन फरीदाबाद की जूनियर रेडक्रॉस, गाइड्स और सैंट जॉन एंबुलेंस ब्रिगेड ने प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा की अध्यक्षता में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह के अंतर्गत धैर्य से यातायात के नियमों का पालन करने बारे वर्चुअल कार्यक्रम आयोजित किया।

विद्यालय की जूनियर रेडक्रॉस और सैंट जॉन एंबुलेंस ब्रिगेड प्रभारी प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा और कार्यक्रम संचालक डॉक्टर जसनीत कौर ने कहा कि भारत में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह प्रत्येक वर्ष जनवरी माह में मनाया जाता है। वर्ष 2015 में यह दिवस 11 जनवरी से 17 जनवरी तक मनाया गया था। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से आमजन को यातायात नियमों की आधारभूत जानकारी मिलती है। आकस्मिक कारक के रूप में सड़क दुर्घटनाओं के विश्लेषण से पता चलता है कि कुल सड़क दुर्घटनाओं में 78.7 प्रतिशत चालकों की गलती से होती हैं। इस गलती का कारण शराब एवम मादक पदार्थों का प्रयोग, वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करना, वाहनों में जरुरत से अधिक भीड़ होना, वैध गति से अधिक तेज़ गाड़ी चलाना और थकान आदि होना है। जल्दी पहुँचने की चाह मे हम कई बार गाड़ी ओवेरटेक करने का प्रयास करते हैं जो की काफ़ी रिस्की होता है। किसी बड़ी गाड़ी को ओवेरटेक करने से पहले भली भांति जांच ले कि आपके ओवेरटेक करने से आपको ओर दूसरे चालकों को परेशानी ना हो। ओवेरटेक करने से एक्सीडेंट होने के ज़्यादा आशंका रहती है।

आपने अक्सर ट्रॅफिक मे लोगो को लगातार हॉर्न बजाते हुए देखा होगा और भारत मे तो ये आम बात है। कुछ लोगो को यह लगता है कि वे अधिक हॉर्न का प्रयोग करेंगे तो ट्रेफिक खुल जाएगा या सामने ट्रेफिक साफ हो जाएगा पर आप ग़लत है। जब आप अत्याधिक हॉर्न का प्रयोग करते है तो आगे वाला वाहन चालक दबाव मे आता है ओर ध्वनि प्रदूषण फैलता है।

प्राचार्य मनचंदा ने बताया कि आकस्मिक कारक के रूप में सड़क दुर्घटनाओं के विश्लेषण से पता चलता है कि कुल सड़क दुर्घटनाओं में 78.7 प्रतिशत चालकों की गलती से होती हैं। चालकों की गलती को लगभग 80 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाओं का जिम्‍मेदार पाया गया है, इसलिए उन्‍हें जागरूक बनाना और यह आभास कराना आवश्‍यक है कि जब वे नियमों ओर उपायों का उल्‍लंघन करते हैं तो वे सड़कों पर हत्‍यारे बन जाते है। प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा और कॉर्डिनेटर डॉक्टर जसनीत कौर ने छात्रा हर्षिता और निशा का सभी को धैर्य पूर्वक वाहन चलाने के लिए जागरूकता अभियान के लिए आभार व्यक्त किया।

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