जे.सी. बोस विश्वविद्यालय में विश्व जल दिवस 2026 के उपलक्ष्य में दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन

फरीदाबाद, 27 मार्च : जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद के पर्यावरण विज्ञान विभाग एवं सिविल इंजीनियरिंग विभाग ने वसुंधरा इको-क्लब, संरचना क्लब तथा डीन स्टूडेंट वेलफेयर के सहयोग से विश्व जल दिवस 2026 के उपलक्ष्य में दो दिवसीय कार्यक्रम का सफल आयोजन किया।
इस कार्यक्रम की थीम “जल और लिंग” रखी गई थी, जिसका उद्देश्य जल संरक्षण के महत्व तथा जल प्रबंधन में लैंगिक समानता की भूमिका के बारे में जागरूकता लाना था। कार्यक्रम की सराहना करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजीव कुमार ने कहा कि ऐसे सामाजिक रूप से प्रासंगिक कार्यक्रम छात्रों में जल संरक्षण एवं सतत विकास की भावना को मजबूत करते हैं तथा उन्हें दैनिक जीवन में टिकाऊ प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं।

इस आयोजन का प्रो. अजय रँगा (कुलसचिव), प्रो. राजकुमार (डीन, फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी) तथा प्रो. अनुराधा शर्मा (डीन, फैकल्टी ऑफ साइंसेज) के मार्गदर्शन एवं पूर्ण सहयोग से किया गया।

पर्यावरण विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्षा डॉ. रेणुका गुप्ता ने विश्व जल दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला और छात्रों को जल संरक्षण के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी करने के लिए प्रेरित किया। डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. प्रदीप डिमरी ने कार्यक्रम की थीम “जल और लैंगिक समानता” पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि सतत जल प्रबंधन केवल तभी संभव है जब समाज के सभी वर्गों की समान और समावेशी भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ताओं के रूप में डॉ. जगदीश चौधरी (निदेशक, बालाजी कॉलेज ऑफ एजुकेशन) तथा श्री कौशल किशोर (प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता एवं मैनेजिंग एडिटर) ने अपने विचार रखे।
डॉ. जगदीश चौधरी ने सरल प्रयोगों के माध्यम से जल के बारे में अनोखे नजरिए प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि जल में भी भावनाएँ होती हैं, इसलिए हमें इसके प्रति गहरा सम्मान विकसित करना चाहिए। उन्होंने जल की बर्बादी कम करने, वर्षा जल संचयन अपनाने तथा घरेलू अपशिष्ट को कम करके जल संसाधनों के संरक्षण पर बल दिया।
श्री कौशल किशोर ने जल प्रदूषण की गंभीर समस्या पर चिंता व्यक्त की और जागरूकता तथा जिम्मेदार व्यवहार के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने नदियों के भावनात्मक एवं पारिस्थितिक महत्व पर चर्चा की तथा प्रसिद्ध लेखकों के कार्यों का उल्लेख करते हुए पर्यावरणीय एवं सामाजिक चुनौतियों पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने बायोमास ऊर्जा संकट, सतत संसाधन प्रबंधन तथा अरावली पर्वतमाला के पारिस्थितिक महत्व पर भी अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम के दौरान थीम पर आधारित पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार श्रिष्टि (बी.एससी. गणित) को, द्वितीय पुरस्कार छवि शर्मा (बीबीए) को, तृतीय पुरस्कार स्नेहा राज (बी.टेक सिविल) को तथा सांत्वना पुरस्कार वर्णिका सैनी (एमबीए) को प्रदान किया गया।
कार्यक्रम का समापन पर्यावरण विज्ञान विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ. अनिता गिरधर द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया। इस कार्यक्रम में वसुंधरा इको क्लब एवं संरचना क्लब के सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी की। कार्यक्रम का संचालन इंजी. विवेक रावत, डॉ. अनिता गिरधर, इंजी. योगेश मोर्या, डॉ. नविश कटारिया तथा डॉ. संदीप रविष के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक किया गया।



