वर्ल्ड जूनोसिस डे पर कोरोना के प्रति जागरूक किया

फरीदाबाद 6 जुलाई। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एन एच तीन फरीदाबाद में वर्ल्ड जूनोसिस डे पर सैंट जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड और जूनियर रेडक्रॉस ने कोरोना के प्रति जागरूक किया। एस जे ए बी, जे आर सी काउन्सलर तथा विद्यालय के प्रधानाचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने कहा कि जूनोसिस उन बीमारियों या संक्रमणों को दिया गया नाम है जो जानवरों से मनुष्यों में संचारित हो सकती हैं। इस तरह की बीमारी एक जानवर या इन्सेक्ट से व्यक्ति तक पहुंचती है। जूनोसिस के प्रकारों में निम्न शामिल हैं – विषाणु, जीवाणु, फंगस तथा परजीवी। कोरोना महामारी भी जुनोसिज श्रेणी में आती है। जूनोटिक बीमारी शॉर्ट टर्म से लेकर मेजर लाइफ चेंजिंग तक हो सकती हैं। कुछ लोगों की इनके संपर्क में आने से मृत्यु भी हो सकती है।
रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने बताया कि कोरोना भी एक जूनोटिक बीमारी है, जो अभी नई-नई उभरकर लोगों के सामने आई है जिसकी मार पूरी दुनिया झेल रही है। आपको बता दें कि लगभग 150 जूनोटिक रोग अभी अस्तित्व में हैं। आमतौर पर, इस तरह की बीमारी के इलाज की तुलना में जूनोटिक डिजीज से बचाव करना ज्यादा आसान है। जूनोटिक रोग वायरस, बैक्टीरिया, पैरासाइट और फंगी जैसे हानिकारक कीटाणुओं के कारण होते हैं। ये रोगाणु लोगों और जानवरों में कई तरह की बीमारियों का कारण बन सकते हैं। आमतौर पर पशु में जर्म्स होने के बावजूद भी वह हेल्दी दिखाई देता है लेकिन, यह लोगों को बीमार कर सकता है। रेबीज, डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया आदि।
किसी संक्रमित जानवर के लार, ब्लड, यूरिन, म्यूकस, स्टूल या शरीर के अन्य तरल पदार्थों के संपर्क में आने से जूनोटिक बीमरी होने की संभावना बढ़ जाती है। संक्रमित जानवरों को छूने या थपथपाने या उनके काटने या खरोंच के कारण भी हो सकता है। यह बीमारी प्रेग्नेंट महिलाएं, 65 या उससे अधिक उम्र के लोग, 5 वर्ष या उससे छोटे बच्चे, एच आई वी पीड़ित लोग, कैंसर पीड़ित जो कीमोथेरेपी करा रहे हैं तथा कमजोर इम्युनिटी वाले लोग इस रोग से शीघ्र प्रभावित हो सकते है। प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा और प्राध्यापिका सोनिया वमल ने बालिकाओं खुशी, सिमरन, तबिनदा, रागिनी, रोशनी और पूनम द्वारा बनाए ई पोस्टर की सराहना की तथा जानवरों से फैलने वाली जूनोसिज बीमारियों विशेषकर कोरोना से सचेत रहने, मास्क पहनने तथा सामाजिक दूरी बनाए रखने का संदेश दिया।



