अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस – शिक्षा रूपी ज्ञान से ही अंधकार मिटाना संभव

फरीदाबाद ! राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एन एच तीन फरीदाबाद की सैंट जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड, जूनियर रेडक्रॉस तथा गाइडस ने प्राचार्य एवम् ब्रिगेड अधिकारी रविन्द्र कुमार मनचन्दा के निर्देशानुसार अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर वर्चुअल जागरूकता अभियान के अन्तर्गत छात्राओं ने पेटिंग और स्लोगन लिख कर साक्षर बनने और बनाने का प्रयास कर के समाज के अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाने का आह्वान किया। जूनियर रेडक्रॉस काउन्सलर एवम् प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने कहा कि साक्षरता दिवस को मनाने का उद्देश्य समाज में लोगों के प्रति शिक्षा को प्राथमिकता देने को बढ़ावा देना है। वर्ष 1966 में पहला साक्षरता दिवस मनाया गया था। 2009-2010 को सयुंक्त राष्ट्र साक्षरता दशक घोषित किया गया। उसी दिन से सम्पूर्ण विश्व में 8 सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस मनाया जाता है।
मनचन्दा ने बताया कि मानव विकास और समाज के लिए उनके अधिकारों को जानने और साक्षरता की ओर मानव चेतना को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है। सफलता और जीने के लिए साक्षरता बेहद महत्वपूर्ण है। प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने कहा कि साक्षरता का अर्थ केवल पढ़ने-लिखने या शिक्षित होने से ही नहीं है। यह लोगों के अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूकता लाकर सामाजिक विकास का आधार निर्धारित कर सकता है। संयुक्त राष्ट्र के एक आंकड़े के अनुसार सम्पूर्ण विश्व में चार अरब लोग साक्षर हैं और आज भी एक अरब लोग पढ़-लिख नहीं सकते हैं। वर्ष 2018 में जारी एमएचआरडी की शैक्षिक सांख्यिकी रिपोर्ट के अनुसार भारत की साक्षरता दर लगभग सत्तर प्रतिशत है। यह संख्या गांव और शहर दोनों को मिलाकर है। ग्रामीण भारत में साक्षरता दर पैसठ प्रतिशत है जिसमें महिलाओं की साक्षरता दर तो पुरुषों की साक्षरता दर से कम है। इसी प्रकार शहरी भारत में साक्षरता दर साढ़े ऊनासी प्रतिशत है जिसमें चोहत्तर दशमलव आठ प्रतिशत महिलाएं पढ़ी-लिखी हैं। वहीं तिरासी दशमलव सात प्रतिशत पुरुष पढ़े-लिखे हैं।
जूनियर रेडक्रॉस प्रभारी प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने बताया कि भारत में साक्षरता दर कम होने के पीछे बहुत से कारण हैं। इनमें विद्यालयों की कमी, स्कूल में शौचालय आदि का अच्छी अवस्था में न होना, पिछड़ापन, गरीबी, लड़कियों से छेड़छाड़ होने का डर, जागरूकता की कमी जैसे बहुत से तथ्य शामिल हैं। प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के लिए अपने सभी अध्यापकों का बहुत बहुत आभार और अभिनन्दन किया क्योंकि अध्यापकों और छात्राओं के सक्रिय सहयोग के अभाव में इन्हें आयोजित करना असम्भव है। आज भी प्रधानाचार्य, संयोजिका प्राध्यापिका डॉक्टर जसनीत कौर, छात्रा तनु, निशा, सिमरन तथा रोशनी ने तथा प्राध्यापिका सोनिया बमल ने प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को ऑनलाइन प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया तथा कहा को शिक्षा रूपी ज्ञान के प्रकाश से ही अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाया जा सकता है।



