आरएसएस शताब्दी वर्ष: फरीदाबाद में जुटे प्रबुद्ध नागरिक, राष्ट्र साधना के 100 वर्षों पर हुआ गहरा मंथन

राष्ट्र की शक्ति है सामाजिक अनुशासन: मेजर जनरल असीम कोहली

  • नागरिक संगठनों की भूमिका अहम: एस. के. गुलाटी
  • विश्व पटल पर बढ़ रही हिंदू दर्शन की स्वीकार्यता: विजय कुमार
  • शिक्षा और संस्कार ही भविष्य का आधार: डॉ.देव प्रसाद भारद्वाज

फरीदाबाद, 19 जनवरी : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (फरीदाबाद महानगर पूर्व) द्वारा सेक्टर-12 स्थित हुड्डा कन्वेंशन सेंटर में ‘प्रबुद्ध नागरिक संगोष्ठी’ का आयोजन किया गया। संघ के शताब्दी वर्ष (1925-2025) की श्रृंखला के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में सामाजिक, धार्मिक, खेल जगत और आरडब्ल्यूए से जुड़े शहर के सैकड़ों गणमान्य एवं प्रबुद्ध नागरिकों ने भाग लिया। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य राष्ट्र सेवा में संघ की 100 वर्षों की गौरवमयी यात्रा और समसामयिक सामाजिक विषयों पर संवाद स्थापित करना रहा। संगोष्ठी में आरडब्ल्यूए कन्फेडरेशन ऑफ एनसीआर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एस.के. गुलाटी, अखिल भारतीय सह व्यवस्था प्रमुख विजय कुमार, सेवानिवृत्त मेजर जनरल असीम कोहली, मुख्य वक्ता डॉ.देव प्रसाद भारद्वाज, सह विभाग संघचालक जय किशन, महानगर संघचालक उमेश गुप्ता की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सेवानिवृत मेजर जनरल असीम कोहली ने अपने उद्बोधन में राष्ट्र सुरक्षा और नागरिक कर्तव्यों पर बल दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की सीमाएं तभी सुरक्षित रहती हैं जब उसका समाज आंतरिक रूप से अनुशासित और जागरूक हो। संघ ने पिछले 100 वर्षों में व्यक्ति चरित्र निर्माण के माध्यम से समाज को संगठित करने का जो कार्य किया है, वह आधुनिक भारत के लिए एक मजबूत नींव की तरह है।

विशिष्ट अतिथि एवं कन्फेडरेशन ऑफ एनसीआर आरडब्ल्यूए के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एस.के.गुलाटी ने अपने संबोधन में नागरिक समाज की भागीदारी पर विचार रखते हुए कहा कि आरडब्ल्यूए और सामाजिक संगठन समाज की बुनियादी इकाई हैं। उन्होंने आह्वान किया कि ‘पंच परिवर्तन’ जैसे अभियानों को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए प्रबुद्ध वर्ग को आगे आना होगा, ताकि हमारे शहर-समाज अधिक सुरक्षित और संस्कारित बन सकें।

मुख्य वक्ता के रूप में अखिल भारतीय सह व्यवस्था प्रमुख विजय जी ने संघ के शताब्दी वर्ष के संघर्ष गाथा और विकास यात्रा पर क्रमवार उल्लेख करते हुए बताया कि संघ की यह 100 वर्षों की यात्रा समाज के सहयोग और आशीर्वाद से बहुत गौरवमयी रही है। आज देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी हिंदू दर्शन की स्वीकार्यता बढ़ रही है। सामूहिक पुरुषार्थ के माध्यम से सामान्य नागरिकों में राष्ट्रीय चेतना का निरंतर विकास हो रहा है।

विद्या भारती हरियाणा प्रांत अध्यक्ष डॉ. देवप्रसाद भारद्वाज ने बतौर मुख्त वक्ता अपने उद्बोधन में शिक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना ही राष्ट्र सेवा का सबसे बड़ा पुण्य का कार्य है। विद्या और संस्कार के समन्वय से ही भारत पुनः विश्व गुरु के पद पर आसीन होगा। युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका से ही इस कार्य को गति मिलेगी।

कार्यक्रम के अंत में फरीदाबाद पूर्व महानगर संघचालक उमेश कुमार ने सभी आगंतुकों, उपस्थित गणमान्य नागरिक एवं प्रबुद्धजनों का धन्यवाद व्यक्त किया। संगोष्ठी में सुधीर, अनुसूइया दीदी और संतोष सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने व्यवस्थाओं में सहयोग दिया। उपस्थित नागरिकों ने राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में अपना सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।

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