ओ..ठहर जरा इंसान…तू सुन ले सारंगी की तान

सूरजकुंड : सांरगी वादन में हरियाणा के कलाकार मेले में आ रहे पर्यटकों का मन मोह रहे हैं। तार की मीठी धुन पर बजने वाली सारंगी सुनने वाले को दिलीआराम देती है।

हिसार से आई सतबीर सिंह की पार्टी में चार सारंगीवादक व दो ढपली वादक हैं। प्रतापसिंह किठाना जिला कैथल से अपनी सारंगी पार्टी लेकर आए हैं। प्रेम जोगी खरल जींद से सारंगी कलाकारों को लेकर आए हैं। इन तीनों दलों में छ:-छ: सदस्य हैं। गांवों में जोगी कहे जाने वाले इन सारंगीवादकों ने बताया कि उनका परिवार कई पीढिय़ों से शास्त्रीय राग-रागनी, किस्सा हीर रांझा, सुल्तान निहाल दे, शशि पन्नु, बीजा सोरठ, दुल्हा भ_ïी आदि सुनाते आ रहे हैं।

सतबीर ने बताया कि राजा महाराजा के समय में साखे सुनाए जाते थे। जिनमें अमरसिंह राठौर, राजा जसवंत सिंह, जयमल फत्ते आदि अब भी गाए जा रहे हैं। जोगी इनको बड़े चाव से गाते हैं। प्रेम ने बताया कि लैला मजनूं की तरह सुल्तान निहाल दे और शशि पन्नु दोनों प्रेमी युगल थे। जिनका निश्छल प्रेम रहा व उन्होंने वासना के वशीभूत होकर प्यार नहीं किया था। लोग आज भी इन किस्स्सों को सुननने के लिए उन्हें गांव में बुलाते हैं। उन्होंने बताया कि हीर-रांझा दस दिन तक गाया जाता है। जहां यह सुनाया जाता है, वहां पशुओं की बीमारी नहीं रहती और दिल के मरीज ठीक हो जाते हैं।

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