घटते भू-जल को बचाने के लिए किसान डीएसआर मशीन से धान की करें सीधी बिजाई : डॉ अनिल कुमार

- 15 से 20 प्रतिशत तक होती है पानी की बचत
फरीदाबाद, 23 जून। उप-कृषि निदेशक डा. अनिल कुमार ने कहा कि धान की बिजाई का समय आ गया है, किसान भू-जल, लेबर व समय की बचत करने के लिए धान की सीधी बिजाई डीएसआर मशीन द्वारा करें। इस विधि से पहले खेत में लेजर लेवलर द्वारा समतल किया जाना जरूरी है और इसके बाद तर-बतर अवस्था में धान की सीधी बिजाई की जा सकती है। उन्होंने बताया कि इस विधि से बिजाई करने में 15 से 20 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है। इस मशीन द्वारा किसान रेतीली जमीनों में बिजाई न करें व केवल उन्हीं खेतों में बिजाई करें जिसमें किसान पहले से ही धान की फसल ले रहे है। जहां एक ओर धान की सीधी बिजाई वाली विधि से पैदावार, रोपाई करके लगाई गई धान की फसल के बराबर होती है वहीं दूसरी ओर फसल 7 से 10 दिन पहले पक कर तैयार हो जाती है। जिस कारण धान की पराली सम्भालने व गेहूं अथवा सब्जियों की बिजाई करने के लिए अधिक समय मिल जाता है।
उन्होंने कहा कि धान के सीजन में किसान पारम्परिक विधि से धान की पौध तैयार करके धान की रोपाई अपने-अपने खेतों में करते हंै। इस विधि में खेत में पानी भरकर रोपाई की जाती है व रोपाई के बाद में भी पानी खड़ा रखना पड़ता है। इस समय तापमान अधिक होने के कारण पानी का वाष्पिकरण होने से पानी की खपत बहुत अधिक मात्रा होती है और परिश्रम अधिक करना पड़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि जो किसान धान की खेती को छोड़कर मक्का की खेती करना चाहते हैं व मेज पलान्टर के द्वारा मेढों पर मक्का की बिजाई भी कर सकते हंै, जिससे पानी की अत्याधिक बचत होती है। इन दोनों कृषि यंत्रों को खरीदने पर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा समय-समय पर अनुदान उपलब्ध करवाया जाता है। इसके अतिरिक्त विभाग के पास डीएसआर मिशन होती है, वह किसानों को पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर बुक की जाती है। उन्होंने कहा कि मक्का बिजाई मशीन फ्री में उपलब्ध करवाई जाएगी तथा इसके लिए किसान अपना आधार कार्ड कार्यालय में जमा करवाकर मशीनों का लाभ उठा सकते हैं।



