फरीदाबाद के सूरजकुंड मेले में बने विभिन्न द्वार लोगों को लुभा रहे हैं

फरीदाबाद, 5 फरवरी। अरावली की पथरीली माटी में बसा सूरजकुंड अपने 34 सालों के सफर में मिनी भारत बन चुका है। हर साल किसी ना किसी भारतीय प्रदेश को थीम स्टेट के रूप में चुना जाता है। ये सभी राज्य मेला परिसर में बनाए गए विभिन्न द्वारों की वजह से आज भी अपनी उपस्थिति यहां दर्शा रहे हैं। सूरजकुंड मेला ग्राउंड में आने के लिए महरौली रोड पर पांच मुख्य प्रवेश द्वार बनाए गए हैं। हर गेट पर कोई ना कोई स्टेट का प्रतीक द्वार बना हुआ है। उदाहरण के तौर पर वीआईपी तीन नंबर गेट से पर्यटक प्रवेश करें तो केरल का कोटï्टायलांबा द्वार आपका स्वागत करता प्रतीत होगा। इस राज्य को वर्ष 1991 में थीम स्टेट बनाया गया था। इसी प्रकार गेट नंबर पांच पर हिमाचल का चंडीदेवी और माता ज्वाला देवी द्वार आपका अभिनंदन करते प्रतीत होंगे। इससे थोड़ा आगे ही हैदराबाद की चारमीनार गोलगुंबद की अनुकृति बनी हुई है। वर्ष 1995 में सूरजकुंड मेले के थीम स्टेट रहे पंजाब के रामबाग की कलाकृति भी दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। वर्ष 2003 में मेले का प्रमुख सहयोगी उत्तराखंड अपनी स्टेट के द्वार से गढ़वाल की याद ताजा बनाए रखता है।
साल 2016 में थीम स्टेट रहे तेलंगाना का प्रवेश द्वार राज्य की संस्कृति को दर्शा रहा है। इस बार के थीम स्टेट हिमाचल ने भी सुप्रसिद्घ भीमाकाली मंदिर की हूबहू अनुकृति बनाकर पर्यटकों को हिमाचल की देवभूमि का अनुभव करवा रही है। वर्ष 1996 में भी यही राज्य सूरजकुंड का प्रमुख प्रदेश था। उस समय का 24 साल पुराना हिमाचल द्वार देखकर लगता है, जैसे इसे चार दिन पहले ही बनाया गया हो। पर्यटकों को भी इन द्वारों और प्रतीकात्मक इमारतों के सामने खड़े होकर सेल्फी या फोटो लेने से काफी खुशी का एहसास हो रहा है। अन्य द्वारों में शाक्य तंगयुंग मोंटेसरी, उजबेेकिस्तान, मारूति टेंपल झारखंड, विष्णुपुर द्वार पं.बंगाल, दंतेश्वरी देवी मंदिर मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ द्वार, गोआ स्वागत द्वार पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र तो हैं ही, साथ ही इन राज्यों से आने वाले पर्यटकों को भी उनकी भूमि की स्मृति करवाते हैं। कुल मिलाकर सूरजकुंड में आने से लगता है कि हम एक ही परिसर में बनाए गए मिनी भारत में आ गए हैं। इसे देखकर भारत देश की एकता, अखंडता और हमारी विविध संस्कृति का एहसास होता है।



