यूनिवर्सल अस्पताल ने ईएसआई के मरीज के तीन वाल्व बदलकर तथा बाइपास सर्जरी कर मरीज को दी नई जान

फरीदाबाद : यूनिवर्सल अस्पताल में इक्मो टैक्नीक से ईएसआई मरीज की जटिल हार्ट सर्जरी करके उसे नया जीवनदान दिया गया। मरीज गुलशन खातून जिसकी उम्र 43 वर्ष है, जो फरीदाबाद की ही रहने वाली हैं, जिसको सांस लेने में शिकायत थी तथा छाती में दर्द की शिकायत लेकर उसने पहले ईएसआई अस्पताल में दिखाया। ईएसआई अस्पताल में ईको में पाया गया कि उसके तीनों वाल्व में दिक्कत है और मरीज को ऑपरेशन के लिए यूनिवर्सल अस्पताल भेजा गया। गुलशन खातून जिसको दो-तीन बार धूक के अंदर खून आ चुका था और बैठे-बैठे खूब सांस फूलता था और पूरे शरीर और चेहरे पर सूजन आ गई थी। मरीज ने ईएसआई में दिखाने से पहले देश के प्रतिष्ठित संस्थान एम्स में भी दिखाया जहां भी उन्हें बताया गया कि मरीज के दिल के तीन वाल्व खराब हैं और इन्हें बदलना आवश्यक है। मानव शरीर में तीन वाल्व होते हैं जो शरीर में जितना भी खून आता है उसको फेफडे़ में शुद्ध होने के लिए भेजते हैं और फेफड़े उस खून को पूरे शरीर में आपूर्ति करते हैं। इसी वजह से सारा रक्त फेफड़ों में पानी की नली द्वारा पूरे पेट में और पैरों में सूजन के रूप में इकट्ठा हो रहा था।

मरीज को बताया गया कि इस प्रकार के आपरेशन में जान का खतरा 20 से 25 फीसदी बना रहता है। और चूंकि मरीज की उम्र 43 थी इसलिए ऑपरेशन से पहले एंजियोग्राफी की गई। एंजियोग्राफी में यह पाया गया कि मरीज के दिल की तीन में एक नस भी बंद थी तो ऑपरेशन और भी मुश्किल हुआ। मरीज की चार में से तीन वाल्व बदलने की आवश्यकता थी तथा बाइपास सर्जरी करने की भी आवश्यकता थी। मरीज के रिश्तेदारों ने काफी हिम्मत दिखाई और ऑपरेशन के लिए अनुमति दी। मरीज को ऑपरेशन के लिए ले लिया गया। मरीज ने यूनिवर्सल अस्पताल में आकर हृदय रोग विशेषज्ञ डा. शैलेष जैन से परामर्श किया। डा. शैलेष जैन ने मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए अपनी टीम में डा. अशोक सिंघल, डा. संजय, डा. रीति अग्रवाल, डा. सोहेब, डा. अरोड़ा, डा. गौरव जैन को नियुक्त किया। मरीज का ऑपरेशन के लिए निर्धारित किया गया कि मरीज की दो वाल्व बदली जाएंगी। एक वाल्व रिपेयर किया जाएगा तथा साथ ही बाइपास सर्जरी किया जाएगा। एक ही तरीके से यह माना जाए कि एक मरीज के अंदर तीन ऑपरेशन होने वाले थे – बाइपास सर्जरी, दो वाल्व का बदलना और एक वाल्व को रिपेयर करना। मरीज का आपरेशन करीब दस घंटे चला, जिसमें कुल 16 यूनिट रक्त की आवश्यकता पड़ी। मरीज को आपरेशन के बाद 24 घंटे तक वंेटीलेटर पर रखा गया। जब मरीज को आपरेशन थियेटर से शिफ्ट कर रहे थे तो मरीज अपना ब्लड प्रेशर मेंटेन नहीं कर पा रहा था तो इसके लिए उसको 24 घंटे इक्मो तकनीक जिसे बोलते हैं एक्स्ट्रा कोप्रोरियल मेम्ब्रेन ओक्जीनेशन। जिसमें आपके हार्ट का काम एक आर्टिफिशियल हार्ट करता है, उस मशीन पर रखा गया। इस मशीन को हमने कोविड के दौरान भी खूब सुना था, जब मरीज का फेफड़ा काम नहीं करता है और आक्सीजन मेंटेन नहीं करता है या बीपी मेंटेन नहीं कर पा रहा था तो इस मशीन पर रखा जाता है। 24 घंटे मरीज को इक्मो मशीन पर रखा गया। उसके बाद उसे नार्मल बैड पर शिफ्ट किया गया। मरीज वेंटिलेटर और इक्मो मशीन से हटाने के बाद अब पूरी तरह से स्वस्थ है।

यूनिवर्सल अस्पताल के डा. शैलेष जैन ने बताया एक ही मरीज के अंदर तीनों वाल्वों को बदलना तथा बाइपास सर्जरी करना अपने आप में एक काफी रिस्की ऑपरेशन है। अस्पताल की मेडिकल डायरेक्टर डा. रीति अग्रवाल ने डा. शैलेष जैन, डा. गौरव, डा. पवन को सफल ऑपरेशन पर बधाई दी और उन्होंने कहा कि यूनिवर्सल अस्पताल एक ऐसा अस्पताल है जहां पर एक ऐसी कैथलैब सुविधा उपलब्ध है जिसे हाइब्रिड कैथलैब बोलते हैं जिसके अंदर एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी, बाइपास सर्जरी एक ही कमरे में कर सकते हैं। अमूमन क्या होता है कि एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी की अलग-अलग जगह होती है और बाइपास सर्जरी या ओपन हार्ट सर्जरी करने के लिए अलग ऑपरेशन थियेटर होता है। लेकिन इस तकनीक को हाईब्रिड ओटी होता है जिसमें आप तीनों काम एक ही जगह कर सकते हैं।

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