ध्यान साधना में ध्वनि क्रिया का महत्वपूर्ण योगदान

गुरुग्राम (मदन लाहौरिया) 3 मार्च। गुरुग्राम के डीएलएफ फेस वन के जी ब्लॉक स्थित एनसो वैलनेस स्टूडियो में ध्वनि क्रिया के साथ एक ध्यान साधना के सत्र में बेहतर तरीके से लोगों को ध्यान साधना की क्रिया करवाई गई! इस ध्वनि क्रिया के साथ ध्यान साधना करवाने के लिए तिब्बत के प्राचीन तरीके से कांसे व विशेष प्रकार की मिश्रित धातु से बने हुए बाउल्स की टंकार से धीमी धीमी ध्वनि की आवाज कर के क्रिया करवाई गई जिससे ध्यान साधना करने में बहुत ही अनोखी अनुभूति हुई व इस क्रिया से ध्यान साधना में मन व मस्तिष्क की एकाग्रता जल्दी लगी! ध्यान साधना की इस ध्वनि क्रिया में एक विशेष प्रकार के वाध्ययंत्र का भी इस्तेमाल किया गया जिस का नाम डीडमैरीडो है व यह डीडमैरीडो वाध्ययंत्र साँस की एक विशेष तकनीक से बजाया जाता है और इस तकनीक से एक गहरी वाइब्रेशन पैदा होती है जिस से ध्यान साधना करने में बहुत आसानी होती है व मन जल्दी एकाग्र हो जाता है!

इस वाध्ययंत्र को बजाने वाले सचदीप कुमार से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि इस वाध्ययंत्र से निकलने वाली गहरी ध्वनि व तरंगे ध्यान करने वाले व्यक्ति के मन व मस्तिष्क में गहरा प्रभाव डाल कर ध्यान साधना की गहराई में जाने के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है!

तिब्बत की प्राचीन ध्वनि क्रिया पर आधारित विशेष धातु के बाउल्स की ध्वनि की टंकार से क्रिया करने के एक्सपर्ट सौरभ कालरा से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि इस ध्वनि क्रिया के माध्यम से जो तरंगे निकलती हैं वे ध्यान लगाने में बहुत ही महत्वपूर्ण साबित होती हैं!

एनसो वैलनेस स्टूडियो की संचालिका अरूबा कबीर से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि वे एक मैंटल हैल्थ थेरेपिस्ट हैं व एनसो वैलनेस स्टूडियो में ध्यान साधना के करवाये जाने वाले कई बेहतर तरीकों से लोगों के मन व मस्तिष्क की बीमारियों को ठीक करने में काफी सकारात्मक परिणाम आते हैं! अरूबा कबीर ने बताया कि इस वैलनेस स्टूडियो में ध्यान साधना के अलावा और भी कई तरीकों से लोगों के मानसिक तनाव को ठीक करने के लिए कार्य किया जाता है जिससे लोगों को मानसिक तनाव में काफी राहत मिलती है!

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