गुरुग्राम का कूड़ा प्रबंधन गंदी राजनीति का हुआ शिकार !

गुरुग्राम (मदन लाहौरिया) 14 जनवरी। जहां तक सवाल है कूड़ा प्रबंधन का वो तो एक साधारण सी सोच के अनुसार सदियों से किसी भी सरकार के द्वारा होता आया है! देश में पहले भी तो जनसंख्या के अनुपात से कूड़े कर्कट की सफाई व्यवस्था का इंतजाम किया गया होगा परंतु पहले कभी बड़े बड़े विज्ञापन के होर्डिंग बोर्ड लगा कर या बड़ी बड़ी सेमिनार महंगे होटलों में सफाई अभियान के नाम पर करोड़ों रूपये खर्च कर के आयोजित कर के सफाई व्यवस्था का ड्रामा नहीं किया गया! आज गुरुग्राम सहित पूरे प्रदेश को जरूरत है जमीनी स्तर पर कूड़े कर्कट के प्रबंधन को सुचारु रूप से लागू करने की! सेमिनार कर के डिजिटल स्क्रीन पर बड़े बड़े डेमो दिखाने से क्या कोई कूड़े कर्कट का प्रबंधन सही ढंग से हो जायेगा! कदापि नहीं होगा! कूड़े कर्कट के प्रबंधन को ले कर गुरुग्राम की व्यवस्था पर बार बार सवालिया निशान क्यों लग रहे हैं? यह एक गंभीर मुद्वा है! पिछले पांच वर्षों में गुरुग्राम सहित पूरे हरियाणा प्रदेश में कूड़े कर्कट के प्रबंधन के विषय में जमीनी स्तर पर कोई कार्य नहीं हुआ! कोई भी सेमिनार या कांफ्रेंस या प्रचार प्रोपेगेंडा किसी योजना का किया हुआ तब अच्छा लगता है जब उस योजना को जमीनी स्तर पर लागू कर दिया गया हो! गुरुग्राम के कूड़े प्रबंधन की दुर्दशा देख कर मन में पीड़ा उठती है कि बड़ी बड़ी बातें करने वाले मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने पिछले पांच वर्षों में गुरुग्राम की कूड़ा कर्कट के प्रबंधन की समस्या का हल क्यों नहीं निकाला! जमीनी स्तर पर लोगों से बात होने के बाद मामला जो खुल कर आया वो यह है कि यहां पर भाजपा के स्थानीय नेताओं ने पार्षदों व निगम अधिकारीयों के साथ मिल कर कूड़े के प्रबंधन की समस्या पर एक बहुत बड़ी गंदी राजनीति का खेल खेला!
यहां के सभी आरडब्लूए के जो लोग अपने स्तर पर कूड़े के प्रबंधन की वैज्ञानिक तरीके से व्यवस्था कर रहे थे उन को दरकिनार कर के पार्षदों ने कूड़े पे धंधा करने के लिए एक गहरी साजिश रची! पहले मुख्यमंत्री खट्टर को गुमराह कर के गुरुग्राम की सफाई व्यवस्था का ठेका एक चीन की कंपनी को दिलवाया गया और उसी साजिश के तहत सरकारी सफाई कर्मचारियों को नाकारा बनाया गया व सफाई व्यवस्था दुर्दशा का आरोप सरकारी सफाई कर्मचारियों पर लगाया गया! पार्षदों ने नगर निगम के अधीन पार्कों व ग्रीन बेल्टों को कूड़े की नगरी बना दिया व खुद अपने वार्डों में गंदगी के ढेर लगवाये! पार्षदों ने अपने अधीन पार्कों व ग्रीन बेल्टों का सुधार तो किया नहीं और अब चल पड़े आरडब्लूए के अधीन आने वाले पार्कों को अपने अधीन ले कर कूड़ा घर बनाने की तरफ! इसी गंदी राजनीति के चलते पर्यावरण और प्रदूषण के विषय पर आयोजित इस दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस में यहां की सभी आरडब्लूए के पदाधिकारियों को अधिकृत रूप से पहुँचने के लिए कोई सूचना तक नहीं दी गई! इस बात से अंदाजा लगता है कि निगम के अधिकारी भाजपा के स्थानीय नेताओं व पार्षदों के साथ मिलीभगत कर के आरडब्लूए के लोगों को कूड़ा प्रबंधन की व्यवस्था से दरकिनार कर देना चाहते हैं जो कि आम जनता के हितों के साथ एक गहरी साजिश है! इस कांफ्रेंस की सूचना के बारे में जब आरडब्लूए के पदाधिकारियों से पूछा गया तो सेक्टर 23 ए,27,28,31,9,10 व 10 ए के पदाधिकारियों ने स्पष्ट तौर पर कहा कि उन्हें इस पर्यावरण व प्रदूषण के विषय पर आयोजित कांफ्रेंस की कोई सूचना नहीं दी गई! इन सभी लोगों का कहना था कि यदि उन्हें सूचना दी जाती तो वे इस कांफ्रेंस में जरूर हिस्सा लेते! आरडब्लूए के लोगों को पर्यावरण व प्रदूषण की कांफ्रेंस से दूर रखने की साजिश से यह साबित हो गया है कि गुरुग्राम में कूड़ा प्रबंधन पर एक बहुत ही गंदी राजनीति का खेल खेला जा रहा है जिस के कारण आम जनता को बड़ी भारी परेशानी उठानी पड़ रही है! चलो अब बात करते हैं पर्यावरण और प्रदूषण पर आयोजित दो दिवसीय रीजनल कांफ्रेंस की!
पर्यावरण के विषय को लेकर आयोजित दो दिवसीय रीजनल कांफ्रेंस में पहले दिन गुरुग्राम के हिपा परिसर के सभागार में विशेषज्ञों ने पर्यावरण व ठोस कचरा प्रबंधन के विषय में चर्चा की! पहले दिन इस कांफ्रेंस में एनजीटी सदस्य बाबूराम,प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष अशोक खेत्रपाल,जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वीएस कुंडू,शहरी स्थानीय निकाय के प्रधान सचिव वी.उमाशंकर व पर्यावरण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव धीरा खंडेलवाल मौजूद थी! इस मौके पर वी.उमाशंकर ने संबोधित करते हुए कहा कि पहले हमारी जरूरत रोटी कपड़ा और मकान की थी! उस के बाद शहरों की प्राथमिकताओं में बिजली,पानी,सडक़ शामिल हुए और अब पर्यावरण व ट्रेफिक हो गये हैं! अन्य वक्ताओं ने बोलते हुए कहा कि ठोस कचरा प्रबंधन तथा पर्यावरण प्रदूषण हर व्यक्ति के लिए चिंता का विषय है! पानी का सरंक्षण करने से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट पर दबाव कम होगा और ये प्लांट अपनी क्षमता के अनुसार पानी को शुद्ध कर पायेंगे! आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं गुरुग्राम नगर निगम आयुक्त विनय प्रताप सिंह ने पहले दिन आये हुए अतिथियों का आभार व्यक्त किया!
दूसरे दिन गुरुग्राम के सरहौल बार्डर स्थित होटल लीला में पर्यावरण विषय पर आयोजित इस रीजनल कांफ्रेंस में संबोधित करते हुए एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस ( सेवानिवृत) आदर्श कुमार गोयल ने कहा कि देश में ठोस व तरल कूड़ा निस्तारण के लिए सस्ते और सतत मॉडल विकसित करने की आवश्यकता है जिस में आम नागरिकों,एनजीओ,संस्थाओं व सरकारी अधिकारीयों इत्यादि सभी को शामिल किया जाना चाहिए! राज्य सरकारें सभी को साथ ले कर लोगों को पर्यावरण सरंक्षण के लिए जागरूक करें और सरकार इस के लिए बेहतर नेतृत्व प्रदान करे!
बतौर मुख्य अतिथी संबोधित करते हुए जस्टिस ए.के.गोयल ने बढ़ते हुए प्रदूषण पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रदूषण के मामले में आज स्थिति बहुत गंभीर है! इस का समाधान करने की बहुत जरूरत है! हमारे पास क्षमता होने के बावजूद हमें यह पता ही नहीं कि करना क्या है? उन्होंने कहा कि औधोगिक क्षेत्र पूरी तरह से प्रदूषित हो चुके हैं! प्रदूषण और गंदगी का वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण किया जाये! सविंधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ पर्यावरण नागरिकों का मौलिक अधिकार है और राज्य सरकारें लोगों को यह अधिकार प्रदान करना सुनिश्चित करें!
पूर्व जज एवं सीपीसीबी के चेयरमैन सीपीएस परिहार ने संबोधित करते हुए कहा कि कचरे को रिसाइकिल व रियूज करने की दिशा में आगे बढ़ते हुए हमें कचरे का प्रबंधन सही ढंग से करना चाहिये! कचरा प्रबंधन को जमीनी स्तर पर ठीक ढंग से करने के लिए शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों को एक साथ ले कर चलना होगा! उन्होंने कहा कि कचरे से रेवेन्यू जनरेट करने की तरफ ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि इस से आमदनी के साधन जुटाये जा सकें!
वहीँ कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए एनजीटी द्वारा गठित ठोस कचरा प्रबंधन तथा घग्गर मॉनिटरिंग कमेटी अध्यक्ष पूर्व जस्टिस प्रीतमपाल ने कहा कि हरियाणा से गुजरने वाले सभी राष्ट्रीय राजमार्ग,राज्जीय राजमार्ग तथा रेल पटरियों के साथ गंदगी ना हो,इस पर काम करना होगा! उन्होंने कहा कि पर्यावरण सरंक्षण और प्रदूषण कम करने की दिशा में गुरुग्राम व हरियाणा को मॉडल के रूप में बन कर उभरना चाहिये ताकि हरियाणा दूसरे राज्यों के लिए उदाहरण बन सके!
इस अवसर पर दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व जज एस पी गर्ग, पूर्व जज एवं सीपीसीबी के चेयरमैन सीपीएस परिहार,हरियाणा की मुख्य सचिव केशनी आनंद अरोड़ा,शहरी स्थानीय निकाय के प्रधान सचिव वी.उमाशंकर,पर्यावरण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव धीरा खंडेलवाल,यूपी एनजीटी अध्यक्ष डा. अनूप चंद्र पांडे,पंजाब एनजीटी सदस्य सुबोध चंद्र अग्रवाल,जस्टिस जसबीर सिंह,पूर्व जस्टिस प्रीतम पाल, यमुना मॉनिटरिंग कमेटी सदस्य वीएस सजवान,घग्गर एवं ठोस कचरा प्रबंधन एनजीटी कमेटी सदस्य उर्वशी गुलाटी एवं स्वामी सम्पूर्णानंद मौजूद थे!



