एमवीएन विश्वविद्यालय द्वारा इग्नाइटिंग माइंड सीरीज़ के अंतर्गत ऑनलाइन सत्र आयोजित किया गया

फरीदाबाद। एमवीएन विश्वविद्यालय द्वारा इग्नाइटिंग माइंड सीरीज़ के अंतर्गत एचआर, उद्यमिता और स्टार्ट अप के प्रख्यात वक्ताओं के साथ वार्ता का ऑनलाइन सत्र आयोजित किया गया, जिसकी थीम उद्योग व शैक्षणिक संस्थान के बीच के अंतराल को कम कर आगे बढऩा था। सत्र में मुख्य रूप से एफएमए के अध्यक्ष अभय कपूर व विशिष्ट पैनलिस्ट के रूप में फिलिप मैथ्यूसन (निदेशक – ट्रानजय़िम), वी. त्यागराजन , रेणु बोहरा (सीएचआरओ डीबी शेंकर), राकेश सेठ (एच आर मेंटर) , जे जयंती (निर्देशक पेप्लोज़ेन्न) सलोनी कौल (इट्स पीपल), सहित भारत व विदेश के उद्योग जगत की बड़ी हस्तियों ने भागीदारी देकर अपने अनुभव और विचार साँझा किये। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य उद्योगों तथा शिक्षण संस्थाओं के बीच के अंतर को पहचाना तथा इस अंतराल को भरने के लिए उचित कदम उठाना था। उद्योग जगत से आए प्रतिनिधियों ने युवाओं के लिए विभिन्न उद्योगों के रोजगार के अवसरों के बारे में जानकारी दी तथा बताया कि किस तरह विद्यार्थियों के कौशल विकास द्वारा उन्हें रोजगार योग्य बनाया जा सकता है।

विश्व विद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर डॉ. जे. वी. देसाई ने सत्र के आयोजन के लिए बधाई दी और अपनी राय दी की शिक्षा क्षेत्र तथा उद्योगों के बीच परस्पर भागीदारी और मजबूत संबंध समय की मांग है। ऐसी भागीदारी संयुक्त रूप से अनुसंधान व विकास प्रयोगशालाओं की स्थापना या संयुक्त रूप से परामर्श परियोजनाओं के रूप से शुरू किया जा सकता है जोकि दोनों के बीच फायदेमंद होगा।
वही यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रोफ़ेसर डॉ राजीव रत्न ने अपने सुझाव में कहा की उद्योग जगत को शिक्षण संस्थानों में उद्यमशीलता विकास कार्यक्रम, प्रबंधन विकास कार्यक्रम, प्रयोजित अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों जैसी विभिन्न पहल में सहयोग देने के लिए प्रयास करने चाहिए। वहीं इस सत्र का नेतृत्व करने वाले एसबीएमसी विभाग के प्रोफ़ेसर डॉ. संजय कुमार सदाना ने अपने विचार और सुझाव रखते हुए देश में उद्योग व शिक्षण संस्थानों के बीच संबंधों की वास्तविक स्थिति से परिचित कराया और कहा की उद्योग और शिक्षा क्षेत्र को एकीकृत दृष्टिकोण रखते हुए एक-दूसरे की अपेक्षाओं को पूरा करना होगा ताकि भावी मानव संसाधन को बेहतर अवसरों के लिए तैयार किया जा सके। इस कार्यक्रम के आयोजन में सीआरसी जनरल मेनेजर गौरव सैनी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सत्र के अंत में विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों द्वारा उद्योग जगत के प्रतिनिधियों का आभार जताया।



