गीले व सूखे कूड़े के चक्रव्यूह में उलझ गई आम जनता

गुरुग्राम (मदन लाहौरिया) 29 दिसंबर। गुरुग्राम की आम साधारण जनता आजकल एक अजीबोगरीब धर्मसंकट में है! जनता का संकट व परेशानी यह है कि आजकल गुरुग्राम में जनता का भला करने वाली एनजीओ रातोंरात काफी संख्या में पैदा हो गई है! इन एनजीओ में कुछ ऐसी भी है जो नगर निगम गुरुग्राम से मिलीभगत कर के कूड़े कर्कट की भिन्न भिन्न योजनायें अपनी मर्जी से बना कर व उन का नगर निगम के सहयोग से प्रचार कर के आमजनता को गुमराह कर रही हैं! हरियाणा सरकार को तुरंत प्रभाव से कार्यवाही करते हुए गुरुग्राम की ऐसी फर्जी व दुकानदारी चलाने वाली सभी एनजीओ पर सरकारी योजनाओं को गलत तरीके से प्रचार करने के आरोप में रोक लगा देनी चाहिये क्यों कि ये दुकानदारी करने वाली एनजीओ कूड़े कर्कट की गलत योजनाओं पर अपनी मर्जी से भिन्न भिन्न प्रयोग कर के जनता को गुमराह कर रही हैं!

गुरुग्राम की आम गरीब जनता व मध्यम वर्ग सुबह से ले कर शाम तक अपनी रोजी रोटी कमाने के कार्य में लगा रहता है! आम साधारण जनता अपने घरों में कूड़े का एक डस्टबिन ही रख पाती है! कुछ एनजीओ अपनी मर्जी से ही नगर निगम के अधिकारीयों से मिलीभगत कर के लोगों को अपने घरों में कूड़े के लिए चार अलग अलग डस्टबिन रखने के लिए प्रचार करते रहते है और सरकार के नाम से यह संदेश देते हैं कि कूड़े के चार डस्टबिन रखने जरूरी हैं! ठोस कचरा प्रबंधन नियम-2016 के तहत प्रतिदिन 50 किलोग्राम या इस से अधिक का कचरा निकालने वाले लोगों को ही रोजाना कूड़ा कर्कट अलग अलग डस्टबिनों में रखना होगा! सरकार के अनुसार यह नियम आम जनता पर लागू नहीं है! केवल रेस्टोरेंट व होटल ढाबों पर यह नियम अनिवार्य तौर पर लागू होगा! गुरुग्राम में ईको ग्रीन कंपनी के द्वारा या किसी भी निजी ठेकेदार की कूड़ा कर्कट उठाने वाली रेहडिय़ों के द्वारा मिक्स रूप में ही कूड़ा उठा कर मिक्स ही डंपिंग स्थान पर डाला जाता है और मिक्स रूप में ही कूड़ा वाहनों के द्वारा बंधवाड़ी प्लांट पर ले जाया जाता है! ईको ग्रीन कंपनी के द्वारा बंधवाड़ी प्लांट पर कूड़े कर्कट को अलग अलग करने के लिए ट्रोमल मशीनें पिछले तीन साल में तो लगाई ही हीं और अब दो ट्रोमल मशीनें लगी हैं जब कि बंधवाड़ी प्लांट पर पड़े हुए 35 लाख टन कूड़े कर्कट को अलग अलग करने के लिए कम से कम 20 से 25 मशीनें लगानी होंगी तब जा कर इतनी बड़ी तादात में पड़ा हुआ कूड़ा कर्कट रिसाइकल करने के लिए अलग अलग हो पायेगा! सूत्रों के अनुसार एक ट्रोमल मशीन की कीमत लगभग 55 लाख रूपये है और ये ट्रोमल मशीन अपने ही देश की निर्मित हैं व देश के कई शहरों में कूड़े को अलग अलग करने के लिए लग चुकी हैं!

अब सवाल यह उठता है कि जब कूड़े को बड़े स्तर पर अलग अलग करने के लिए अपने ही देश निर्मित ट्रोमल मशीनें आसानी से उपलब्ध हैं तो फिर बंधवाड़ी प्लांट पर पिछले तीन साल में ये मशीनें ना लगा कर कूड़े कर्कट का एक विशाल पहाड़ खड़ा कर दिया गया व नगर निगम,जीएमडीए तथा ईको ग्रीन कंपनी के अधिकारीयों के साथ कुछ दुकानदारी करने वाली एनजीओ ने मिलीभगत कर के गुरुग्राम की जनता को गीले सूखे कचरे के चक्रव्यूह में डाल कर उलझा दिया! गुरुग्राम की कुछ बिल्डर सोसायटियों में रहने वाले हजारों परिवारों के द्वारा ईको ग्रीन कंपनी को कूड़ा कर्कट उठाने नहीं दिया जाता और उन सोसायटियों में रहने वाले कुछ लोगों ने अपनी फर्जी एनजीओ बनाकर अपनी मर्जी से ही कूड़े कर्कट पर प्रयोग किये जा रहे हैं और वही प्रयोग इन फर्जी एनजीओ के लोग नगर निगम के अधिकारीयों से मिलीभगत कर के आम जनता पर थोपना चाहते हैं जो कि गैरकानूनी है! अभी नगर के सफाई विंग ने ईको ग्रीन को कचरा नहीं देने पर 50 बिल्डरों को नोटिस भेजे हैं!

इस बारे में जनवादी सफाई कर्मचारी कल्याण संघ के सलाहकार राजेंद्र सरोहा जब बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि कूड़े का प्रबंधन व निस्तारण करवाने की जिम्मेवारी पूर्णतया सरकार की है! जो कार्य सरकार ने करना है वो काम कोई एनजीओ या दूसरे कोई लोग क्यों करें? कोई भी एनजीओ अपनी दुकानदारी करने के लिए ही सरकार के साथ मिलीभगत करेगी! यह तो कटु सत्य है! राजेंद्र सरोहा ने आगे बताया कि गुरुग्राम की कालोनियों में आम साधारण जनता बसती है और वह साधारण और गरीब जनता अपनी रोजी रोटी कमाने में लगे रहने के कारण कूड़े के लिए अपने घरों में एक डस्टबिन ही मुश्किल से रख पाते हैं तो चार चार डस्टबिन कैसे रखेंगे! उन्होंने बताया कि आमजनता को कूड़े कर्कट के अलग अलग डस्टबिन रखने में उलझाने की बजाय बंधवाड़ी प्लांट पर ही कूड़े कर्कट को अलग अलग करने के लिए ज्यादा से ज्यादा ट्रोमल मशीनें लगाई जायें ताकि कूड़े के निस्तारण का समाधान हो जाये! दूसरी ओर जब हिसार के किसान नेता चंद्रभान काजला से बात की गई तो उन्होंने बताया कि हिसार में सिरसा रोड़ पर ढंढूर गावं के पास लगभग 6 एकड़ जमीन में कूड़े कर्कट का पहाडऩुमा डंपिंग स्थान बना दिया गया है व यहां पर भी कूड़ा मिक्स रूप में ही डाला जा रहा है! उन का भी कहना है कि जब कूड़े कर्कट को अलग अलग करने की ट्रोमल मशीनें अपने देश की निर्मित उपलब्ध हैं तो फिर आमजनता को गीले व सूखे कचरे के चक्रव्यूह में क्यों उलझाया जा रहा है!

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