श्रमिक कानूनो में किए गए बदलाव के खिलाफ भारतीय मजदूर संघ ने उपायुक्त के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम सौंपा मांगपत्र

फरीदाबाद-28 अक्टूबर। भारतीय मजदूर संघ ने केंद्रीय श्रमिक कानूनो में किए गए बदलाव के खिलाफ उपायुक्त के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम मांगपत्र सौंपा है। भारतीय मजदूर संघ, फरीदाबाद समय-समय पर संगठित व असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, अनुबंधित कर्मचारियों, प्रवासी मजदूरों, योजना कर्मियों व नियमित कर्मचारियों की मांगों व समस्याओं को लेकर भारत सरकार को अवगत करवाता रहा है । भारत सरकार ने 44 श्रम कानूनों को निरस्त कर मात्र 4 सहिंता (कानून) बनाए हैं, जिसमें भारत सरकार द्वारा श्रमिकों को मौलिक अधिकारों से वंचित करके पूॅजीपतियों के दबाव में श्रमसंघों के सुझावों को दरकिनार कर, जल्दबाजी में श्रम कानूनों को समाप्त कर दिया। इसके साथ-2 सरकार विभिन्न भविष्य निधियों में जमा फंडों के संचालन को भी निजी संस्थाओं को देकर शेयर बाजार में निवेश करने की योजना कर रही है।
इसके अतिरिक्त यूनियनों के अधिकारों को छीनने एवं हस्तक्षेप को रोकने के लिए सरकार द्वारा किया गया प्रयास अत्यंत निंदनीय है। इसकी भारतीय मजदूर संघ कडे शब्दों में निंदा करता है । इन श्रम कानूनों को खत्म करके जो नए 4 लेबर कोड (श्रम संहिताएं) बनाई गई हैं, उसके कारण देश के श्रमिकों पर निम्नलिखित प्रभाव पडेंगे, जैसे बाल श्रम कानूनी हो गया है, ठेकेदारी प्रथा अब गैर कानूनी नहीं रही है, सबसे अहम यह कि 8 घंटे के काम के अधिकार को खत्म करके मालिकों को श्रमिक के ओवर टाईम लगाने की अनिवार्यता की इजाजत दे दी गई है। अब महिलांए रात्रि काल में असुरक्षित स्थिति में काम करेंगी। 5 प्रवासी मजदूर कहीं एक राज्य से दूसरे राज्य में रोजगार के लिए जायेंगे तो उनका पंजीकरण अनिवार्य नहीं रहा है। फिक्सड टर्म एम्पलायमैंट को बढावा मिलने की वजह से नौकरी करना असुरक्षित होगा। एक टर्म पूरी होने पर मालिक चाहेगा तो रखेगा अन्यथा नहीं।
घरेलु उद्योग मालिक अपने लोगों को लगाकर यूनियन चलाएगा एवं कामगारों को शोषण करने के लिए रास्ता उन्मुक्त हुआ है, जहॅा 100 था अब हुआ 300 जहाॅ 300 से कम लोग काम करेंगें वहाॅ प्रबंधन कभी भी सरकार को बिना बताए लोगों की छंटनी कर सकता है। रास्ता साफ हुआ है। श्रम संघों को मजदूरों के हित के लिए हडताल करना आसान नहीं रहा है। चाहे लोग अधिकार से वंचित रहे या मर भी जाए, परफारमैंस के नाम पर किसी भी समय किसी की भी नौकरी चले जाना आसान हो गया है। जिस संस्थान में 20 से कम लोग काम करेंगे वहॅा बोनस की डिमांड नहीं की जा सकती, जहॅा 300 से कम कामगार काम करेंगें वहॅा स्टैंडिंग आर्डर की आवश्यकता ना होना खतरनाक होगा। वर्तमान में ईएसआई, ईपीएफ जैसी 6 कल्याणकारी योजनांए अच्छी तरह से काम कर रही है। सरकार द्वारा इस व्यवस्था को कमजोर करने के लिए एवं ईपीएफ अर्थ को समाप्त करने के लिए कई आम योजनाओं को सम्मिलित करना मजदूरों के लिए घातक सिद्ध होगा।
भारतीय मजदूर संघ फरीदाबाद के जिलामंत्री नीरज त्यागी ने बताया कि हमारे संगठन की कुछ स्थानीय मांगे हैं जो इस प्रकार है:. 2006 के बाद लगे कर्मचारियों पर पुरानी पैंशन स्कीम लागू की जाए। मॅहगाई व अन्य भत्तों पर लगाई गई रोक हटाई जाए। भवन निर्माण को वेतन अदायगी अधिनियम के अंतर्गत लाकर अथोरिटी की स्थापना की जाए तथा इन श्रमिकों को म्च्थ् ध् म्ैप् के दायरे में लाया जाए। भवन निर्माण के श्रमिकों ने विभिन्न स्कीमों के अंतर्गत लाभ लेने के लिए आवेदन फार्म भरे हैं उनमें से अधिकतर फार्मों को रदद किया जा रहा है, इस प्रथा पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा वंचित निर्माण श्रमिकों का पंजीकरण किया जाए।बिजली एवं अन्य विभागों में अस्थाई कर्मचारियों को यथावत अनुभव को वरियता देते हुए विभाग में समायोजित किया जाए तथा ठेकेदार को बीच से हटाया जाए तथा 58 वर्ष की आयु तक रोजगार को सुनिष्चित किया जाए। समान काम व समान वेतन व्यवस्था लागू की जाए।
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में एजूसेट चैकीदारों / सफाई कर्मी / सेवादार / कहार / मिड-डे-मील कुक / आशावर्कर को मूलभूत सुविधा दी जाए तथा मानदेय बढाया जाए।
इसी प्र्कार सरकारी स्कूलों में पिछले 15-20 वर्षों से लगभग 4940 पार्ट टाईम कर्मचारी (सफाई कर्मी / सेवादार / कहार) के पदों पर कार्यरत है। विभाग ने प्राथमिक स्कूलों में लगभग 3752 पदों का सर्जन किया है, ये पद आउटसोर्स पोलिसी के तहत भरे जा रहे हैं, इन पर रोक लगाई जाए तथा पहले से कार्यरत कर्मचारियों को नियमित किया जाए।
हरियाणा प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 53400 मिड-डे मील कुक महिलायें कार्यरत हैं जिनका कार्य आंगनवाडी में कार्यरत हैल्पर के समान है। इसलिए इन्हें भी उसी तर्ज पर उनके समान वेतन दिया जाए। हरियाणा के विभागों के साथ- 2 बिजली विभागों में लिपिक वर्ग के कर्मियों को कम्पयूटर टैस्ट जिला मुख्यालय पर लिया जाए। पैक्स कर्मचारियों को पूर्व की भांति केन्द्रीय सहकारी बैंकों में पदोन्नति दी जाए व संषोधित सेवानियम 2017 की विसंगतियों को दूर करवाया जाए।
Haryana State Contract Advisory Labour Board की बैठक बुलाकर नियमित प्रकृति के काम से ठेकेदारी प्रथा को समाप्त करने के लिए उचित कार्यवाही की जाए। राज्य में सभी बिजली निगमों में जोखिम भत्ता दिया जाए। व जो पद त्मेजतनबजनतपदह इत्यादि में खत्म कर दिए गए हैं या किए जाने है, उन्हें खत्म न करके उन पदों पर पुनः भर्ती की जाए, जैसे प्रारूपकार, एलडीसी, यूडीसी, सहायक आदि। स्वास्थय विभाग के अंतर्गत एन एच एम कर्मचारियों के ठलसंूे बना दिए गए हैं परन्तु कुछ कर्मचारियों को इनसे वंचित रख दिया गया है जैसे कि अर्बन हैल्थ सैंटर जोकि एन एच एम का ही पार्ट है। उन पर सभी दिषा निर्देष एन एच एम के ही लागू होते हैं, इसलिए हैल्थ सैंटर को भी सेवा नियम का लाभ दिया जाए। आंगनवाडी कर्मचारियों के सेवानियम एन एच एम व सर्वषिक्षा अभियान की तर्ज पर बनाकर नियमित वेतनमान दिए जाएं तथा सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए।
न्यूनतम वेतन कम से कम 18000 रू0 प्रतिमाह किया जाए तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का पे-बैंड 5200-20200 तथा गे्रड पे-1800 दिया जाए। कम्पयूटर प्रोफैषनल्स के सेवानियम बनाकर सेवायें नियमित की जाएं तथा तब तक समान काम-समान वेतनमान दिया जाए ।कैशलैस मैडिकल सुविधा पूरे परिवार पर तथा सभी प्रकार की बीमारियों पर लागू की जाए। शूगर मिल में कार्यरत कर्मचारियों को प्रदेष के अन्य कर्मचारियों की भांति सुविधांए दी जाए। को-ओपरेटिव शूगरमिलों में 7वें वेतन आयोग के एरियर का भुगतान 01.01. 2016 से किया जाए और सभी कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए।
पर्यटन विभाग में भविष्य निधि अनियमितताओं को दूर करके जल्द से जल्द लागू किया जाए व खाली पडे पदों पर पदोन्नति की जाए और समय अनुसार वर्दी दी जाए। हरियाणा प्रदेश में कार्यरत दवा प्रतिनिधियों (एसपीई) के काम के 8 घंटे निर्धारण किए जायें और उनका तबादला हरियाणा से बाहर न हो तथा इनके न्यूनतम वेतन का निर्धारण किया जाए। केन्द्रीय सहकारी बैंकों द्वारा ठेका अधिनियम 1970 तथा नियम 1971 की धारा 25(2)5 धारा 78 का उल्लंघन करके अनुबंधित कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है उस पर रोक लगाई जाए। भारतीय मजदूर संघ मान्यवर से फिर से अनुरोध करता है कि हमारी मांगों पर सहानूभूतिपूर्वक विचार करते हुए यथाशिघ्र पूरा करने की अनुकंपा करें।
इस अवसर पर मुख्यरूप से भारतीय मजदूर संघ फरीदाबाद अध्यक्ष आर सी कटोच, अशोक कुमार, शिवेंद्र प्रताप सिंह, रॉकी, उमेद, बलराम, अमर सिंह मलिक, डॉक्टर दीपक, बाबू आर्य, शैलेश चौधरी, विनोद कुमार, वीरेंद्र यादव, राजेश चौहान, नीरज मावी, गजेंद्र यादव, आर एल राय, धर्मेंद्र, चतर सिंह, राजीव झा, रमेश महरानिया, सुरेंद्र देशवाल उपस्थित रहे।



